शनिवार, 12 सितंबर 2026

व्यायाम [ कुंडलिया ]

 284/2026


         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

करता   है  व्यायाम   जो,   रहता  वह नीरोग।

पड़े-पड़े   सोता   रहे,  करे    देह-सुख भोग।।

करे   देह-सुख  भोग,  रुग्ण  वह रहता भारी।

निष्क्रिय होता   गात,देह   की   होती ख्वारी।।

'शुभम्' आयु  हो न्यून,अल्प वय में वह मरता।

करे देह   व्यायाम, सभी  जीवन  सुख करता।।


                          -2-

मानव   के   तन  के   लिए, सुखकारी व्यायाम।

ज्यों   मछली   जल  में   करे,  तैर-तैर विश्राम।

तैर -तैर     विश्राम ,  एक  पल थिर कब होती।

गहराई   में   खोज ,   रही   है   प्रतिपल मोती।।

'शुभम्'  देह की चाल, दिया करती नित आसव।

कर- कर के व्यायाम, बनें सब सुखमय मानव।।


                          -3-

तेरा तन  दुखमुक्त  हो, करना नित व्यायाम।

गाय भैंस बकरी सभी, देखें  सुबह न शाम।।

देखें   सुबह   न   शाम,देह के आसन करते।

चलते   हैं   दिन-रात, पेट  श्रम करके भरते।।

'शुभम्' बनें  गतिशील,बना मत तन का घेरा।

स्वस्थ  रहे यह   गात, सभी सुख होगा  तेरा।।


                         -4-

डाली हिलती आम की,हिल-हिल कर व्यायाम।

टोह   लगाती   देह   की,सुबह  न  देखे शाम।।

सुबह   न   देखे   शाम, मौत  जड़ता  में होती।

हिले   पवन   के   संग, नहीं   रजनी भर सोती।।

'शुभम्'  रहे  गतिवान, नित्य हो धवल दिवाली।

चर-चर की  ध्वनि  तेज,करे   तरुवर की डाली।।


                         -5-

पानी   भी   तालाब का, हो  जाता जब शांत।

करे नहीं व्यायाम तो,बने  थकित तन क्लांत।।

बने थकित   तन क्लांत, सड़न ही पैदा होती।

मानव   की   यह   देह,बिना श्रम रहती रोती।।

'शुभम्' करें  व्यायाम, करें  कुछ खींचा तानी।

तन   हो ऊर्जावान, सड़े   क्यों तन का पानी।।


शुभमस्तु,


11.9.2026◆11.00आ०मा०

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