सोरठा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोरठा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 31 जनवरी 2026

आया है मधुमास [ सोरठा ]

 055/2026


        

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


आया  है मधुमास, कुहू-कुहू  कोयल    करे।

 कंदर्पी    अनुप्रास,    आम्रकुंज    में  गूँजते।।

  नर   कोयल     के  बोल, अमराई गुंजारती।

मादक मधुरस घोल,सजग  करें परिवेश को।।


नर  ही   करे जगार,  मादा  कोयल मौन है।

नर  से  सुंदर नार,इस   भ्रम  में  रहना नहीं।।

भ्रमर  उड़ें चहुँ  ओर,सरसों  फूली  खेत में।

नाच  रहे  वन मोर, कोयल    कूके  बाग में।।


नर मनमोहक   जान,  कोयल मानव  मोर  में। 

प्रभु का यही विधान, मेढक   भी नर ही फबे।।

पर वाणी   रसदार,   कोयल   काला रंग का।

करना प्रथम   विचार,  नहीं   रूप पर मोहिए।।


ठगे गए हैं काग, समझें  कोयल - कपट  को।

लिखा   यही    दुर्भाग,  सेते   अंडे   छद्म से।।

कोयल धरती मौन,  ऋतु   वसंत   आई नहीं।

वचन समझता कौन,असमय उचित न बोलना।।


रंग न जानें लोग,  अशुभ  सदा   काला नहीं।

मसधुरस भरे प्रयोग,कोयल  की  वाणी सुनें।।

नहीं देख रँग -रूप,प्रथम   आचरण जानिए।

है   माधुर्य  अनूप,कोयल  ज्यों  काली भले।।


भले एक   ही   रंग,  कोयल   कागा एक-से।

सुनते ही सब दंग,जब   खोलें   रसनांग को।।


शुभमस्तु ,


29.01.2026◆8.45 आ०मा०

                   ◆◆◆

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

विस्तार [ सोरठा ]

 601/2025


     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अनथक    करें  विकास,जीवन को विस्तार  दे।

बिखरे विमल  उजास,सुमन खिलें जीवन  फले।।

अंड     पिंड   ब्रह्मांड,   अंबर  के  विस्तार  में।

सूरज  सोम   अखंड, सबका  नित्य सुवास   है।।


एक   सफल विस्तार,  संतति ही परिवार   का।

जीवन     में   अनिवार,  पढ़ें-लिखें   आगे बढ़ें।।

सागर    अतल   अपार,नदियों   का विस्तार   है।

गंगा-यमुना   धार,  निशि -दिन  ही   बहती  रहें।।


होता     सदा     विकास,  शिक्षा के विस्तार  से।

प्रसरित  दिव्य  उजास, देश मनुज -जीवन  बढ़े।।

फूल   और  फल बीज, कलियों का विस्तार  है।

अद्भुत   अनुपम   चीज,   वंश-बेल  बढ़ती   रहे।।


होता   राष्ट्र - विकास,  सड़कों के विस्तार   से।

मिटे   सकल   संत्रास,समय  बचे गति भी   बढ़े।। 

जानें   सकल   सुजान,   महिमा है विस्तार की।

मानव   बने   महान,  गौरव   गरिमा -वृद्धि  हो।।


घटता    है    परिवार,  किया नहीं विस्तार जो।

अकथनीय   सुख -सार, शिक्षा  अतुल प्रकाश है।।

चिंतन      बने    महान,करें सोच - विस्तार   तो।

करें   खोल   उर   दान,छोड़े   लघुता बुद्धि   की।।


चिंतन     यही   महान,  वसुधा  ही परिवार   है।

तनता जगत -वितान,जन -जन का विस्तार ये।।


शुभमस्तु !


02.10.2025 ●8.00आ०मा०

                 ●●●

गुरुवार, 11 सितंबर 2025

बदनाम [ सोरठा ]

 550/2025


                


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


क्यों  होना बदनाम,यदि हों अच्छे   कर्म तो।

चमके कनक  सुधाम, पारस छूता लौह को।।

यह संसार  विराट, सूरज  का साम्राज्य  है।

करनी उसे न बाट,वह होगा बदनाम क्यों??


हो   जाता  बदनाम,  बुरे  कर्म  से आदमी।

सारा  जगत  प्रणाम,करता पाँचों तत्त्व को।।

न हो  नाम बदनाम, आओ वह करनी करें।

नाम  हुआ  है राम, दशरथ-सुत का  कर्म से।।


प्रियता  मिली   समूल,  कैकेई  की धूल  में।

बड़ी  हो  गई  भूल, नाम  हुआ बदनाम भी।।

शिव  शंकर  का  भक्त,रावण यद्यपि  वीर था।

भले गहन अनुरक्त,हुआ नाम बदनाम वह।।


फिर  भी है बदनाम,निशिकर रजनीकांत  है।

दाग लगा  मुख  श्याम,दुष्चरित्र के दाग  से।।

भरे    हुए    है  नीर,सागर  सब  संसार  का।

पिए न जल खग  कीर,खारीपन बदनाम  है।।


पर   चरित्र  बदनाम, यद्यपि धन पर्याप्त हो।

सरे   न  कोई  काम,जीवन उसका है   वृथा।।

लगे  न  कोई  दाग, नारी  नाम चरित्र  का।

खुलें तिया के भाग,नाम न हो बदनाम  तो।।


रखना   पूरा  ध्यान, करनी  और चरित्र  का।

मिले पूर्ण   सम्मान,नहीं इन्हें बदनाम  कर।।


शुभमस्तु !


11.09.2025●5.30आ०मा०

                    ●●●

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

विघ्नेश [ सोरठा ]

 476/2025 



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


भालचंद्र  विघ्नेश,  विनती  करता आपसे।

देवों  में  प्रथमेश, शुभम्  पधारो  गेह  मम।।

नमन   करूँ   शत  बार, एकदंत हेरंब  को।

दर्शन  का  उपहार, वक्रतुंड विघ्नेश   का।।


शिवगौरी सुत आप,लंबोदर गणपति सुमुख।

सकल  'शुभम्' के ताप,हे विघ्नेश  नसाइए।।

विनती   बारंबार,  बुद्धिनाथ   से बुद्धि    की।

देना    कृपा  उदार,  करता  हूँ विघ्नेश   जी।।


मूषक  वाहन  आप, दाता हो शुभ सिद्धि के।

मिटा  सकल संताप,आओ  प्रभु विघ्नेश जी।।

विघ्नों  के विघ्नेश, प्रमुख गणाधिप आप हो।

गौरी     मातु   महेश,  आज्ञाकारी पुत्र    हो।।


धूम्रकेतु    विघ्नेश,मिले विनायक  की  कृपा।

कहता जगत गणेश,शिवसुत गौरी सुत शुभम्।।

कपिल शुभम् शुभ नाम,धूम्रकेतु भगवान का।

सफल करें सब काम,विघ्न हरें विघ्नेश मम।।


नाम जपें   सब  भक्त,भालचंद्र भगवान का।

हम  पद में  अनुरक्त, घर आएँ विघ्नेश जी।।

करें    आरती   भक्त,  वक्रतुंड भगवान  की।

अघ न   करें आसक्त, प्रभु विघ्नेश मिटाइए।।


विनती नमन हजार,'शुभम्'  गजानन से करे।

भव  से  कर दें पार,प्रभु विघ्नेश सहाय हों।


शुभमस्तु !


28.08.2025●8.00आ०मा०

                    ●●●

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

ममता ● [ सोरठा ]

 534/2023

                

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

●© शब्दकार

● डॉ०भगवत स्वरूप 'शुभम्'

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

ममता   का   भंडार, जननी  संतति   के  लिए।

महिमा  अपरम्पार, कष्ट  सहे  निज   देह   पर।।

माता   के   पर्याय,   नेह,  छोह, ममता,   दया।

मन,मानस निज काय,सब संतति को सौंपती।।


यह मानव तन जीव, विलग हुआ  जब गर्भ  से।

याद  न  आया   पीव, ममता   ने बाँधा    उसे।।

धीर,वीर  या  संत,  ममता   किसे  न  बाँधती!

प्रभु -  सा   प्यारा   कंत,धीरे  - धीरे   भूलता।।


तभी    मिलेंगे   राम,   माया  की ममता   तजे।

नहीं   छोड़ता  काम, बंधन  है  यह जीव    का।।

तत्त्व  एक  अनिवार, ममता  मानव  मात्र  को।

जिन्हें  न दया विचार, हिंसक हैं पशु  वन्य  वे।।


ममता  करे  निवास,  साँप  सपोलों  में   नहीं।

करता   हृदय  उजास, मानवता का   अंश   है।।

दया  धर्म   का मेह ,नारी   ममता -  मूर्ति    है।

स्वर्ग   बनाती  गेह,  बरसाती  नित प्रति यहाँ।।


रोक   न  मेरी   राह, ममता - पट में बाँध  कर।

एक मात्र  मम  चाह,  सेवा  करनी राष्ट्र   की।।

बेड़ी    बंधक    तंत्र,   ममता   मेरे   पैर    की।

 रटूँ  एक   यह   मंत्र,  रक्षा  करनी   देश   की।।


बाँध रही दिन-रात,  बहुविध ममता जीव  को।

कभी  नकारे   बात,  बनती  कभी   सकार  ये।

●शुभमस्तु !


14.12.2023●1.00प०मा०

गुरुवार, 13 जुलाई 2023

उल्लास ● [ सोरठा ]

 305/2023

              

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

● ©शब्दकार 

● डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्'

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

नहीं  एक  ही  वास,समय सदा  गतिशील है।

आता  नव उल्लास, घूरे के भी    दिन  फिरें।।

करिए भर उल्लास, छोटा-बड़ा   न   सोचिए।

निज मन का विश्वास,पल भर को खोना नहीं।।


अपना  कोई   काम, करता जो  उल्लास  से।

मिलता फल अभिराम,सदा सफलता ही मिले।

मरा हृदय-उल्लास,जहाँ निराशा  आ   गई।

करता जग उपहास,कदम नहीं बढ़ते कभी।।


खिलते सुख के फूल,जिस घर में उल्लास हो।

महके मलयज धूल,हिलमिल कर रहते सभी।

जिस  घर का  परिवेश,भरा हुआ उल्लास से।

रहें  न  संकट  लेश , बाधाएँ मिटतीं    सभी।।


भरता  मान सुवास,अपने गुरुजन का सदा।

भरा रहे उल्लास, असफल क्या  होना  कदा।।

घर भर में उल्लास,उत्सव शादी   ब्याह  में।

पल -पल बढ़ती आस, नहीं थकाता देह को।।


तन -मन में  उल्लास, मान- प्रतिष्ठा  से  बढ़े।

आता है सुख  रास, किसके जीवन को नहीं।।

कुत्ते   भी   निज  पेट,भर लेते उल्लास    से।

आजीवन  रह  चेट ,हर्षित मन  पाता  नहीं।।


जिसमें अपना वास,करें 'शुभम् ' उस देश को।

भर मन में उल्लास,दिन-दिन हितकर काज।।


●शुभमस्तु !


13.07.2023◆12.45प०मा०

गुरुवार, 11 मई 2023

वरदान ● [ सोरठा ]

 198/2023

              

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

● शब्दकार ©

● डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्' 

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

दिया 'शुभम्' वरदान, कृपावन्त  माँ  शारदा।

पाऊँ कृपा महान,जन्म-जन्म अर्चन  करूँ।।


पाता  है  वरदान, करता जो प्रभु  - साधना।

फिर भी मिलता मान,यद्यपि करे न याचना।।


फल मानव को नेक,बिना कर्म मिलता नहीं।

बिना  साधना  एक, देवों  का वरदान  भी।।


मिलता शुचि वरदान,कर सकार की साधना।

नर परिणाम महान,कब नकार से पा सका।।


सेवा वही सपूत,जनक जननि की जो  करे।

मिलता सुफल अकूत,पाता है वरदान वह।।


परम -पदों का लाभ, गुरु-सेवा  से पा गए।

पीकर अमृत -आभ,पाकर शुभ वरदान वे।।


माँ का ये वरदान,मिला 'शुभम्'को जन्म से।

कविवर श्रेष्ठ महान,बने यशस्वी काव्य का।।


दिए जननि, गुरु, तात,फलीभूत वरदान वे।

मेरा शुभद प्रभात,उनसे ही तन -मन बना।।


कर गुरु माँ की मीत, सच्चे मन से साधना।

मिले सदा ही जीत,मिले पितृ वरदान  भी।।


मिलता  उनको शाप,होता पूत  कपूत जो।

करता है जो पाप,छीन सके वरदान क्या??


पाऊँ मैं वरदान,जन्म-जन्म पितु जननि का।

नित आशीष महान,गुरुवर दें नवज्ञान  का।।


●शुभमस्तु !


11.05.2023◆10.00आ.मा.

                

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...