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©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
जलती अवली दीप की, दीपावली महान।
घर-घर आँगन सज गए,तम का मिटा निशान।।
तम का मिटा निशान, झिलमिलाती सुरसरिता।
तनता ज्योति वितान,चमकती निशि ज्यों सविता।।
'शुभम्' सभी की आज,हर्ष उर - कलिका खिलती।
उजियारा चहुँ ओर,दीप की अवली जलती।।
-2-
आया कार्तिक मास अब, निशा निराली श्याम।
हुआ आगमन राम का, हर्षित हैं जन वाम।।
हर्षित हैं जन वाम, सभी ने दीप जलाए।
दीपावली अनूप, मुदित मन मोद मनाए।।
'शुभम्' सभी नीरोग, भक्ति की निखरी छाया।
जन -जन है खुशहाल, पर्व दीपों का आया।।
-3-
घर- घर में दीपक जले,नगर गाँव बाज़ार।
कहते जन दीपावली , हर्षित सभी अपार।।
हर्षित सभी अपार, जलें छत पर बहु लड़ियाँ।
रहे पटाखे फोड़,चलाएँ जन फुलझड़ियाँ।।
'शुभम्' मधुर पकवान, महकते मीठे दर-दर।
खेलें बालक खेल,नए वसनों में घर -घर।।
-4-
आया पर्व महान ये, दीपावली स्वदेश।
घर -घर में पूजित हुए, लक्ष्मी श्रीगणेश।।
लक्ष्मी श्रीगणेश, धूप फल मोदक लाएँ।
छुएँ पिता के पाँव, जननि ले रही बलाएँ।।
'शुभम्' मुदित मन आज, हर्ष से प्रमुदित काया।
पावन पर्व महान, आज धरती पर आया।।
-5-
आओ हिलमिल प्रेम से,उत्सव मना सगर्व।
दीपावली मनाइए, दीप मालिका पर्व।।
दीपमालिका पर्व, स्वच्छता घर में लाएँ।
लीप -पोत कर साज, गेह का भव्य सजाएँ।।
'शुभम्' एकता गान, सभी मिलजुल कर गाओ।
रहे न द्वेष वितान, संगठित हों सब आओ।।
शुभमस्तु,
05.11.2026◆ 9.30 प०मा०