243/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
छुछूँदर के
सिर में
चमेली का तेल।
बरसाती मेढकों की
टर्र-टर्र
पोखर को जगाया है
घूरे के ढेर पर
कुकुरमुत्ता
उग आया है
कॉकरोच भी
लगा रहे हैं
संसद की सेल।
मुद्दा है एक यही
शांति न रहे
कोई कुछ कहे
हम तो
सदा से भेड़ थे
भेड़ ही रहे
मूँछों को
ऐंठ कर
फेंकना है ढेल।
साजिश ये
देश को बर्बाद
करने की है
शांत शुद्ध
पानी में
धरना धरने की है
चलती हुई
गाड़ी को
करना ही है डिरेल।
शुभमस्तु,
22.07.2026◆3.15 प०मा०
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