353/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
पीने को मिले
या नहीं मिले
फैल ही जाए
यदि दूध की मटकी
बिल्ली खुश रहेगी।
अभी तो दूध फैलाने की
जुगत में लगी है बिल्ली,
एक दिन वह भी आना है
कि खंभा नोचेंगी बिल्ली।
किसी तिलचट्टे को
देश से क्या लेना-देना,
उसका तो लक्ष्य है
सत्तासन को
उधेड़ देना उखाड़ देना।
उनके जाने ये देश
भाड़ में जाय
या देश ही भाड़ बन जाए,
उन्हें तो करनी ही है
काँय ! काँय!! काँय!!!
हाय! हाय !! हाय !!!
कभी मच्छर मक्खियों
कॉकरोचों ने
झंडे गाड़े हैं?
विदेशी हवा से फूले हुए
गुब्बारे हैं,
हवा निकली
कि फुस्स !!
जाएँगे नालियों में घुस।
तिलचट्टों-तिलचट्टियों का
'समुचित इलाज' भी
जरूरी है,
देख रहे हैं कैरोसिन की धार
वरना कोई नहीं मजबूरी है।
इनका कर्म नहीं
इनके 'कांड'
इन्हें छुट्टा साँड़
नहीं रहने देंगे,
कानून के हाथ लंबे हैं,
जनता को देश को
और अधिक नहीं
सहने देंगे।
शुभमस्तु,
15.10.2026◆9.30 प०मा०
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