105/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
गेहूँ गह-गह
गहराया है
हरे-भरे लहराते खेत।
दूधों भरी
सुदीर्घ बालियाँ
अधिक अन्न उपजाएँ
देख -देख
हर्षित किसान है
माप उन्हें उमगाएँ
उन्नतिशील
किसान देश का
सबके भरें निकेत।
आम माप से
जो विशेष हो
गुण भी हों भरपूर
उत्पादन हो
अधिक फसल का
रहे गरीबी दूर
आशाएँ
विश्वास अडिग हों
क्यों न सिद्ध अभिप्रेत!
कृषि प्रधान
हम रहे सदा से
सबकी भूख मिटाना
भूखे पेट न
सोए कोई
ऐसा साज सजाना
बरसें मेघ
समय पर
मन में आए जन के चेत।
शुभमस्तु,
10.03.2026◆6.00आ०मा०
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