279/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
बदल रहा है देश।
बढ़ता नित विद्वेष।।
पनप रहे हैं साँप।
लिया जनों को चाँप।।
आस्तीन के नाग।
लगा रहे हैं आग।।
जनता सब बेहाल।
खड़ा शीश पर काल।।
नेताओं को वोट।
सदा चाहिए ओट।।
झोंक देश को भाड़।
बने पेड़ वे ताड़।।
फूट डालकर राज।
शीश सजाते ताज।।
अगड़ा पिछड़ा भेद।
बढ़ा रहे वे छेद।।
थैली सबकी एक।
दलदल में सब नेक।।
मत करना विश्वास।
नेतागण से आश।।
एक सभी की चाह।
अलग भले हों राह।।
कुर्सी पर आसीन।
कभी न हों वे दीन।।
'शुभम्' वोट की चोट।
करते लूट - खसोट।।
कैसे मिले उजास।
अँधियारे जब पास।।
शुभमस्तु,
31.08.2026◆10.30आ०मा०
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