शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

त्यौहार करवा चौथ है [ नवगीत ]

 381/ 2026


      


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जोड़ने का युगल

बेशक

त्यौहार करवा चौथ है।


एक दूजे के लिए

वे

जी रहे सब जानते

मन में बसी

सद्भावना

इस बात को हम मानते

नेह का लासा  

लगा

व्यौहार करवा चौथ है।


यों तो रसोई में

भले

बर्तन खटक जाते कभी

युगल भी  लड़ते

 परस्पर

पथ से भटक जाते कभी

रूठे हुए 

पति देवता

मनुहार करवा चौथ है।


याद सातों भाँवरें हैं

बीते 

दशक कितने  हमें

भूलें नहीं वे वचन 

सातों

याद आते आज  वे

आनंदमय भावी रहे

बस

उपहार करवा चौथ है।


जिंदगी कल आदमी की

तेल

पड़ना  चाहिए 

एक करवा के 

बहाने

प्यार बढ़ना चाहिए

आओ मिलें गल बाँह

डाले

उद्गार करवा चौथ है।


शुभमस्तु,


30.10.2026◆11.45 आ०मा०

                ◆●◆

सब अपनी-अपनी बात करें [नवगीत ]

 380/2026


   

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दुख - दर्द 

मुझे भी होता है

सब अपनी-अपनी बात करें।


जब हूक उठी

मेरे दिल में

मैं सुबक-सुबक कर रोया हूँ

क्या पता किसी को

रात -रात

मैं नहीं एक पल सोया हूँ

किस किसने

 पौंछे अश्रु मेरे

सब अपनी-अपनी बात करें।


चाहते सभी

कोई आए

आकर रुमाल से पौंछ नयन

ढाढ़स दे

मुझे सांत्वना दे

कुछ करे प्यार से भिगो वचन

जब टूटा था 

पहाड़ मुझ पर

सब अपनी-अपनी बात करें।


खुदगर्ज यहाँ के

लोग बड़े

जब सोचा तो अपना सोचा

अनभिज्ञ रहे

मेरे दुख से

दे गए वक्त पर वे लोचा

फिर भी मैं

भला चाहता हूँ

सब अपनी -अपनी बात करें।


हैं बड़े बहाने

बचने के

पर चोरी पकड़ी जाती है

जब गिरे नहीं

दो अश्रु बिंदु

हृद-कली कहाँ मुस्काती है

आँखें क्यों

उनकी आज झुकीं

सब अपनी -अपनी बात करें।


शुभमस्तु,


30.10.2026◆10.15 आ०मा०

                ◆●◆

छलनी लगाकर रूप का [ नवगीत ]

 379/2026


     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


छलनी लगाकर

रूप का

इज़हार करवा चौथ है।


बूँद भी पानी नहीं

मुख में पड़ा

उपवास है

आयु प्रीतम की बढ़े

यह बात

कितनी खास है

जो ड्रमों में

पैक कर दें

उपसंहार करवा चौथ है।


सावित्रियाँ  

इस देश की

पति को बचातीं काल से

साक्षात मौतें

छत तले

कुछ हैं खड़ीं करवाल ले

मिट रहे आदर्श 

सारे

अब छार करवा चौथ है।


सद्भवना का रंग

काला

संदिग्ध लगता है

आदमी का रूप

रंजित

गिद्ध लगता है

एक दिन की 

चाँदनी 

अनुदार करवा चौथ है।


औपचारिकता 

निभाती

आज ये दुनिया

हर आदमी 

घर में विकल 

निज नारि से दुखिया

है विलासी 

जिंदगी ये

अख़बार करवा चौथ है।


शुभमस्तु,


29.10.2026◆ 8.15 प०मा०

                ◆●◆

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

सरल [ कुंडलिया ]

 378/2026


                 

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

होता है कुछ भी नहीं, अतिशय  सरल उदार।

अग-जग  सारा  वक्र है, करके   देख विचार।।

करके   देख  विचार, भानु  शशि  अंबर तारे।

सागर  धरती  नीर, साथ  जो   नित्य हमारे।।

'शुभम्'  गमन  पथ वक्र,वक्र है जीवन सोता।

कुक्षि जननि की देख,सरल कब मानव होता।।


                         -2-

चाहत   है   तेरी यही,  मिले सरल पथ   एक।

नहीं किंतु   संभव  कभी, सोचें  लगा विवेक।।

सोचें  लगा  विवेक,  वक्रता    ही  पथ तेरा।

खोज   रहा   सारल्य,किंतु   पथ वक्र घनेरा।।

'शुभम्' करें  स्वीकार, मिलेगी तुझको राहत।

सब विधना के हाथ,जदपि कुछ तेरी चाहत।।


                         -3-

खुलता  द्वार  प्रवेश  का,कभी परीक्षा हाल।

प्रश्न सरल या कठिन हों,लगे खड़ा है काल।।

लगे   खड़ा   है काल,नहीं सूझे  क्या  करना।

समय न  जाए भाग,  सभी के उत्तर  भरना।।

'शुभम्'  वृथा तू बैठ, सीट पर यों क्यों घुलता।

सबके  उत्तर   खोज,  कक्ष जब  तेरा खुलता।।


                         -4-

चलना ही सब चाहते, सरल -सरल हो राह।

कठिन नहीं चुनना पड़े,मिले किंतु नित वाह।।

मिले किंतु   नित  वाह, मंत्र मिल जाए कोई।

पंथ सरल अवगाह,मिले  सब  महिमा खोई।।

'शुभम्' भले ही मित्र, पड़े करनी नित छलना।

सभी चाहते  पंथ, सरल   ही   केवल चलना।।


                         -5-

सीमा पर सैनिक खड़ा, चुना कठिन  ही पंथ।

सरल   उसे    भाया नहीं,पढ़े  न भारी ग्रंथ।।

पढ़े न  भारी  ग्रंथ, रात-दिन कठिन लुभाया।

पत्नी   संतति   छोड़,  देश-रक्षा    में आया।।

'शुभम्' न बीमा एक,चला पथ उलझा धीमा।

कठिन   पंथ   का वीर, बचाए  भारत सीमा।।

शुभमस्तु,


29.10.2026◆ 5.45 प०मा०

                   ◆●◆

ब्लॉक नम्बर्स [ नवगीत ]

 377/2026


         

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बहुत सारे

नम्बर्स हैं

जो मैंने ब्लॉक किए हैं।


पहले ही

श्रवण में

जान लिया है मैंने

कभी भी नहीं

इनका

मान किया है मैंने

लगे मुझे बड़े

गड़बड़ हैं

जो मैंने ब्लॉक किए हैं।


ब्लॉक ही नहीं

ये 

डिलीट भी किए हैं

बिना बुलाए

मेहमान-से

मेरा रक्त भी पिए हैं

मेरी सहज चाल की

खड़बड़ हैं

जो मैंने ब्लॉक किए हैं।


मान न मान

चले आए हैं

ठगने के लिए

मिल ही जाए

इन्हें कुछ 

हरने के लिए

किया करते हैं

खड़ खड़

जो मैंने ब्लॉक किए हैं।


हो भी जाइए

सावधान

इन लाल मुँह वालों से

घुसे आते हैं

अनाहूत

बचें नक्कालों से

पास में जो

आपके आएँ

जो मैंने ब्लॉक किए हैं।


शुभमस्तु,


29.10.2026 ◆1.30 प०मा०

                   ◆●◆


समझ गए सब मनसा तेरी [ नवगीत ]

 376/2026



        

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


समझ गए

सब मनसा तेरी

रही जीभ विष घोल।


आग लगाकर

दूर खड़ा हो

देखे  महज तमाशा

बहे सड़क पर

खून नरों का

तुझे दीखती आशा

शुभता नहीं

हृदय में तेरे

बस कुनैन-से बोल।


धुआँ देखकर

जन बस्ती में

बढ़ता तव उत्साह

सुने  श्रवण से

रुदन नारि का

कहता वाहो वाह

नहीं समझ में

आता जन के

क्या है तेरा रोल।


दुःख कष्ट में 

देख देश को

तू करता किल्लोल

सदा त्रास का

राग अलापे

बजा दमन के ढोल

शांति चैन सब

हरने वाला

मात्र ढोल की पोल।


कॉकरोच मच्छर

हैं तेरे

मित्र गले का हार

माँ भी बाप

बंधु सब साथी

हैं लँगोटिया यार

तेरे जैसा

नहीं एक भी

देखी धरती गोल।


देह भले ही

नर की तेरी

पर चमगादड़ एक

बना एक ही

तू धरती पर

मानव शून्य विवेक

लगता  नकली

शेर  बना  तू

 पहने गर्दभ खोल।


शुभमस्तु,


29.10.2026◆10.30 आ०मा०

                   ◆●◆

करवा चौथ [ रोला ]

 375/ 2026


             


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

मनती करवा चौथ, देश   में   भाभी ताई।

पत्नी साली आज,कर रहीं साफ़- सफ़ाई।।

घर-घर में  उल्लास,छा रहा अनुपम ऐसा।

सोने की   बरसात,हो  रही है  कुछ  वैसा।।


                           -2-

हाथ -पाँव  में  लेप, हिना की लिपि मनहारी।

बिसर   गईं  तन   पीर, मिटीं  सारी बीमारी।।

बढ़े  आयु की   बेल, जिए पति सौ-सौ बरसों।

करवा चौथ न भूल, बो  रही  प्रेमिल सरसों।।



                            -3-

सजा  रहीं   निज देह,करें   शृंगार  सजीले।

करवा चौथ महान,  अंग   हैं   बने छबीले।।

नारी   पर्व    अनूप, देश    में   हिन्दू   नारी।

मना रहीं  सह प्रेम, रहें पति सदा सुखारी।।


                         -4-

भारत   देश   महान, प्रथाएँ   यहाँ  हजारों।

मना रहे नर-नारि, गेह सब  सड़क बजारों।।

उनमें   करवा चौथ, एक   है   पर्व निराला।

पियें न दिन भर नीर, नारियाँ भखें निवाला।।


                         -5-

आई    करवा   चौथ,   मनाती    हिंदू  नारी।

स्वच्छ करें   घर -द्वार,  करें   भरसक तैयारी।।

तन-मन   सजा अनूप,  षोडसी-सी    वे झूमें।

नई     शाटिका   धार,   परी-सी    अंबर चूमें।।


शुभमस्तु,

29.10.2026◆8.00 आ०मा०

               ◆●◆

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...