245/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
प्राचीन काल में
हम मंदिर बनाते थे
और विदेशी आक्रांता
लूट लेते थे,
आज मंदिर भी
हम बनाते हैं
और लूट भी
हम ही लेते हैं।
-2-
भगवान को
हम कब
मान्यता देते हैं?
या तो भगवान में आस्था हो
अथवा डर,
आज हमारी
भगवान के प्रति
आस्था है न डर,
इसीलिए तो
लूटे जा रहे हैं
हमारे ही द्वारा
भगवान के मंदिर।
-3-
नियम कानून
ताक पर हैं,
लज्जा हया
नाक पर हैं,
जब सारे वस्त्र ही
उतार दिए
नंगों का कोई
कर भी क्या लेगा ?
-4-
जो लक्ष्य विधान से
संविधान से न मिले
नंगई से
अवश्य मिल जाता है,
इसलिए नंगों का
बहुमत बढ़ रहा है,
और संविधान
ताक पर टंग रहा है।
-5-
नंगा नाचे देखे कौन?
नज़र पड़े तो
सब हैं मौन,
क्या कर लोगे
हमने अपनी उतार दी
तोड़ दी सारी हदें,
तुम भी चाहो तो
कर लो पूरी हसरतें!
शुभमस्तु,
26.07.2026◆ 5.45 आ०मा०
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