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रविवार, 1 जून 2025

सिंदूर ऑपरेशन [अतुकांतिका]

 229/2025

              

*©शब्दकार*

*डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'*


लड़ने का चाव नहीं है हमें

किंतु इतने बुजदिल भी नहीं

कि कोई कमजोर समझ ले

जो छेड़ेगा तो उसे भी छोड़ेंगे नहीं।


माताओं बहनों का जिसने

सिंदूर उजाड़ा है

उनको ही चुन-चुन कर

हमारे सैनिकों ने मारा है।


'सिंदूर ऑपरेशन' 

देख रही है दुनिया

आतंक का परिणाम

धुँआ ही नहीं

आग उगल रहा है।


कर्नल सोफिया कुरैशी

और विंग कमांडर व्योमिका सिंह 

डटी हुई हैं मोर्चे पर 

देश की नारी शक्ति पर

भारतवासियों को गर्व है।


'शठे शाठ्ठयम  समाचरेत'

भूला नहीं है देश

काँटे का इलाज काँटे से

हमें खूब आता है,

झूठ से जो चाहता हमें भरमाना

उसका हुक्का -पानी 

बंद करना ही उपचार है।


शुभमस्तु!


09.05.2025 ●4.15 आ०मा०

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किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...