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सोमवार, 25 मार्च 2024

शुभम् कहें जोगीरा:50 [जोगीरा ]

 152/2024

        


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चार  गधे   मिलकर   घूरे पर,चरते सूखी  घास।

तानाशाह  सोचता  मन  में, उड़ा  रहे उपहास।।

जोगीरा सारा रा रा रा


करे  नहीं विश्वास  किसी पर,लगें सभी  षड्यंत्र।

आपस में ये  सभी गधे मिल,पढ़ें विरोधी    मंत्र।।

जोगीरा सारा रा रा रा


एकछत्र   साम्राज्य    चाहता,वन में खूनी     शेर।

सबके  प्रति  शंका  ही उपजे,खाता क्यों वह बेर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


अन्य  जीव  को   तड़पाने  में, लेता वह   आनंद।

बुनता  वह प्रायः  रहता  है, उलटे-पुलटे   फंद।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शांति  एक  पल  नहीं  सुहाती, तानाशाही   सोच।

देख  दुखी  जनता को अपनी,जन्म न  लेती  लोच।।

जोगीरा सारा रा रा रा


धृतराष्ट्रों    की अंधी   आँखें,देखें महा   विनाश।

देश रसातल  में वह जाता,मिटता पूर्ण   प्रकाश।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा चेतन,करना उसका काम।

भला सुखद हो जीव मात्र का,रक्षक हैं  श्रीराम।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


24.03.2024●6.45आ०मा०

                     ●●●

शुभम कहें जोगीरा :49 [जोगीरा ]

 151/2024

     


© शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जंगल में   चुनाव  का  डंका, बजने लगा  अबाध।

कोई  भी ले  टिकट लड़ सके ,किए भले अपराध।।

जोगीरा सारा रा रा रा


एक नहीं  दो चार सीट से,लड़ने की है  छूट।

जैसे भी  हो  सीट जीतना,करो भले ही  लूट।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जिसके  आगे- पीछे  चलते,गुंडे यदि दस  बीस।

बड़ा    वही    कहलाए  नेता, रहे  नहीं    उन्नीस।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बंदर गधा और  हाथी   ने,  पर्चा  भरा   निशंक।

शेर सिंह   के  आगे    चीता, करे नहीं  आतंक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


नामांकन  हो  रहे  धड़ाधड़,चूहा बिल्ली  साथ।

मौन खड़े खरगोश बराबर,गिद्ध झुकाए माथ।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


हेंचू - हेंचू  गर्दभ बोला,  पालन कर  आचार।

रहें  संहिता  की   सीमा  में, तब हो बेड़ा पार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें  जोगीरा जंगल, बदलेगा अब  राज।

कागा  नहीं   चुगेगा   मोती, हंसराज आगाज।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●9.15प०मा०

                ●●●

शुभम् कहें जोगीरा :48 [जोगीरा ]

 150/2024

     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


डिप्टी   साब  गए  विद्यालय,पूछा एक   सवाल।

नेता की परिभाषा क्या है,बतलाओ सब  हाल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बच्चे बोले  विगत  जन्म में,होता गिरगिट   रूप।

मानव देह मिले जब उसको,पिए सियासत-सूप।।

जोगीरा सारा रा रा रा


मोह   न करता कभी एक से,बदले पाला  रोज।

कुर्सी में ही प्राण बसाता,चमके मुख पर  ओज।।

जोगीरा सारा रा रा रा


आगे- पीछे    गुर्गा   उसके, रहते  हैं दो -  चार।

तेल  लगाते  बाँस  चढ़ाते,करें उसी अनुसार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


नेता  का  विश्वास  न  करना,मार धड़े    मैदान।

अपनी  शेर  रखे  सब  बातें,गाए जनगण गान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बेपेंदी  का  लोटा समझो,कब लुढ़के किस   ओर।

बाप न उसका एक कभी हो,लेता जिया हिलोर।।


'शुभम्' कहें जोगीरा औघड़,है सामान्य  न जीव।

दर्शन  भी  उसके  दुर्लभ   हैं,   घूरे  में    है  नीव।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !

23.03.2024●8.00प०मा०

शुभम् कहें जोगीरा:47 [जोगीरा ]

 149/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


घूरे  के  भी  दिन   फिरते हैं, बारह वर्षों  बाद।

बड़ी  कृपा  की जो नेताजी,आई है अब  याद।।

जोगीरा सारा रा रा रा रा


घूरे   से तो  अच्छे  हो  तुम, सफल गिरगिटानंद।

गर्दभ-विचरण  हो घूरे  पर, पढ़ो सियासत-छंद।।

जोगीरा सारा रा रा रा


मरा आँख  का पानी सारा,फिर भी माँगो  वोट।

लंबी - चौड़ी  बातें  करते,दिखलाते हो    नोट।।

जोगीरा सारा रा रा रा


देना  ही  तो गधा हमें दो,लाकर केवल  एक।

बूढ़ा  गधा  हमारा  है  ये,काम न करता नेक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


लौटे  बिना  साथ में लाए, एक गधा   भी    नेक।

बोले  मिलता  एक  लाख  में,किया हाट में चैक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


गधा बराबर    मोल न मेरा,समझा है क्या   मूढ़?

जाओ  अपनी  राह  यहाँ  से,यहाँ न बसते कूढ़।।


'शुभम्' कहें जोगीरा  फसली,नेता खिसके  द्वार।

मत भी   एक  खरीद  न पाए ,  बंद हुए   उद्गार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●7.00आ०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:46 [जोगीरा ]

 148/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


एक  नहीं    बहुतेरे  रँग  हैं,होली के इस    साल।

कुछ गुजिया कुछ रँग गुलाल हैं, मतमंगे   बेहाल ।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


किसका  रंग  जमे होली में,कौन जा रहा  जेल।

किसके  बाँट  बटखरे  किससे, कर बैठेंगे  मेल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


दिन में झंडा  एक  रंग का,सुबह और   ही  रंग।

बेपेंदी   के   लोटे  लुढ़कें,  चलें और के    संग।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जोड़ - तोड़ का खेल सियासत, जानकार का खेल।

कुर्सी  देवी   की चाहत है,मेल  या  कि    फीमेल।। 

जोगीरा सारा रा रा


घुटे  हुए  तिकड़म  से  अपनी,बना सकें शुभ गैल।

सिद्ध   कर रहे  पैसा  दौलत, है  हाथों का    मैल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


नहीं सियासत सबके वश की, खिलंदड़ों की जीत।

तिकड़म  से  ही  हो  पाती है,कुर्सी अपनी   मीत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें  जोगीरा देशी,करना मत    विश्वास।

नेता होता  नहीं  बाप  का,करता नहीं   उजास।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●5.45प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:45 [जोगीरा ]

 147/2024

        


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अब तो  निकल पड़े नेताजी,अपने मन में ठान।

बने हुए   मतमंगे   सपने , पाले   भर मुस्कान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


पीछे     पूँछ  सोहती  लंबी, बड़ी बुलेरो    कार।

एक नहीं दस बीस दौड़तीं,करतीं धुआँ  धुँआर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


रुका  एक  बरगद  के  नीचे,  कार-काफिला   घेर।

निकल पड़े  कुछ  टोपीधारी, किए बिना कुछ देर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


टोपी रख  बाबा  की  पदरज, माँग रहे  आशीष।

आड़े हाथ  लिया  बाबा ने,  मुखर दिखाई  रीष।।

जोगीरा सारा रा रा रा


अब  आए  हो  पाँच  साल में,फैलाए निज हाथ।

सड़कें कच्ची मिले न बिजली,दिया न हमको साथ।

जोगीरा सारा रा रा रा


संसद से कब फुर्सत मिलती,जो आते  तुम गाँव।

मतलब  पड़ा  चले आए तुम,अब छूते   हो पाँव??

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें  जोगीरा नेता,बोल न पाया  बोल।

जूते जैसा  पड़ा  चाँद  पर,लगा  हुआ   भूडोल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●5.15प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:44 [जोगीरा ]

 146/2023

         

 

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बिना  अनरसे  गुझिया  पापड़,क्या होली त्यौहार।

साली  जीजाजी से बोली,कर   लो आ   ज्यौनार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जीजा कहें शहद भर वाणी,गुझिया का  है चाव।

किंतु अकेले में  शुभ  गुझिया ,देती है   सदभाव।।

जोगीरा सारा रा रा रा


पकड़े गए संग  गुझिया  के, पड़ें शीश बेभाव।

सहलाते हम फिरें रात-दिन,पड़ना मँहगा चाव।।

जोगीरा सारा रा रा रा


इतना  साहस तो  अपना  ही,जीजू रखते आप।

कैसे कायर   हो  जीजाजी,हम दोनों की   माप।।

जोगीरा सारा रा रा रा


धनिया के पौधे  पर हमको,नहीं चढ़ाओ   आप।

बस हमको इतना डर लगता,हो न हाथ से पाप।।

जोगीरा सारा रा रा रा


उठा    हाथ  में रंग  गुलाबी,सँग में लाल  गुलाल।

पोत दिया जीजा जी के मुख,करती बड़ा धमाल।।


'शुभम्' कहें जोगीरा होली,पिचकारी की धार।

साली ने जीजा पर मारी,   मर्यादा अनुसार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●4.30प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:43 [जोगीरा ]

 145/2024

          


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


आड़ खोजकर चतुर आदमी,करता कर्म  'महान'।

शोध   करें  तो  मिलें  हजारों, देखा सकल जहान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


कौन श्रेष्ठ है कौन  निम्नतम,नहीं मापना    ठीक।

जब जैसी भी जुगत  भिड़े वह,सबसे उत्तम नीक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


आड़ धर्म  की जिसके नीचे,झुक जाते जन श्रेष्ठ।

कहते लोग श्रेष्ठतम होती,अन्य सभी में   ज्येष्ठ।।

जोगीरा सारा रा रा रा


धर्म  नाम  है इतना पावन,गोबर भी हो  शुद्ध।

गंगाजल  की  अंजुलि भर से,बुद्धू होते बुद्ध।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


ना ना ना ना धर्म - कर्म में, सोचें बुरी न   बात।

भाव  नकारों  के  मत  लाएँ,हो जाए अपघात।।

जोगीरा सारा रा रा रा


धर्म  भीरुता  मंत्र  अनौखा, डरता जन - जन  धीर।

सोचा  यदि   विपरीत  दिशा में,होंगे फल   गंभीर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा बिदको, मत हे धीर  सुजान।

आड़  ढूँढ़  लो  तुम भी कोई, बच पाएँ तब प्रान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024●7.00आ०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:42 [जोगीरा ]

 144/2024

           

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्


भ्रष्टाचार     जहाँ  रग - रग   में, सुधरे कैसे   देश।

नित्य  तरीके  नए  खोजते, बदल -बदल कर वेश।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जिसकी  पूँछ  उठाई  निकला,वह मादा  अवतार।

है    कोई   जो  कहे शान  से, दूध धुला   मैं  यार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


तरह-तरह की जुगत भिड़ाते,विविध रंग   पर्याय।

सुविधा शुल्क कहीं वह होता,कहीं ऊपरी आय।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बिना  कमीशन काम  न होता,बनें भवन या    रोड।

फिक्स इशारों में सब करते,बदल-बदल कर मोड।।

जोगीरा सारा रा रा रा


रिश्वत  शब्द  शब्दकोशों की,बढ़ा रहा है शान।

रिश्वत  मैं  लेता  या  देता, कहने  में अपमान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


रीढ़   भ्रष्टता  से  परिपूरित,   नेता हो   या दास।

रक्त छानना  हुआ असंभव,तन- मन में है वास।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


'शुभम्' कहें जोगीरा जन-जन,गूँज रही   है    टेक।

क्रय-विक्रय  कचहरी  सभी   में,  हैं उत्कोची नेक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


23.03.2024● 6.15आ०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:41 [जोगीरा ]

 143/2024

        


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


संकर बीज  आदमी  संकर,संकर सुसमाचार।

संकर  कृषि वरदान रोग की,बढ़ती पैदावार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


पैसे  की  खातिर फुड़वा ले,मानुस अपनी  आँख।

संकर  वर्ण संकरी  जिंसें, उड़े बिना ही  पाँख।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शंकर नहीं  हिमालय  वासी, पालें नंदी   भूत।

खेत-खेत दूकान सुसज्जित,संकर ही आहूत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


संकर धनिया हलदी  मिर्चें, संकर दूध  पनीर।

गाय भैंस की नहीं जरूरत,कैमीकल की   भीर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


मरने  पर  रोने  वाले भी ,मिल जाते अब  नित्य।

सब कुछ रेडीमेड मिलेगा,सिद्ध करें औचित्य।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शिक्षक छात्र  विश्वविद्यालय,संकर का बाजार।

सजा हुआ है कुछ भी ले लो,संकर की भरमार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा संकर,संकर अब अनिवार्य।

बिना पढ़े  संकर  डिग्री  भी,बन जाएं   आचार्य।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


22.03.2024●9.45प०मा०

शुभम् कहें जोगीरा:40 [जोगीरा ]

 142/2024

          

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नाते   के   ताने   दुश्मन  हैं, कर देखें प्रतिलोम।

ताने देने  में  अति  कुशला,नारी  का हर    रोम।।

जोगीरा सारा रा रा रा


पति को  पत्नी  नहीं बख्सती,तानों की  बौछार।

करती ही  प्रायः  रहती है,पति पर तीखे   वार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


घायल होता  हृदय पुरुष का,सहता वह  मजबूर।

खानी   है  हाथों  की रोटी,रह न सके  मगरूर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बात यही घर - घर की सच्ची,जा देखो  घर  बीच।

इस  घर  में  या  उस घर में जा,यही मिलेगी कीच।।

जोगीरा सारा रा रा रा


नहीं  जीभ  पर जिसे नियंत्रण,कहती चुभती बात।

सहन हो न हो ताना उसका,लगे किसी को घात।।

जोगीरा सारा रा रा रा


आगा  पीछा  नहीं  सोचना, तिरिया तप्त  चरित्र।

बदल सके जब नहीं  विधाता,छिड़को चाहे इत्र ।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें  जोगीरा तिरिया,मानें या मत मान।

नारी का ताना कु-अस्त्र है,लो जितना भी तान।।


शुभमस्तु !

22.03.2024● 9.15प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:39 [जोगीरा ]

 141/2024

        

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दुनिया  आगे बहुत बढ़ गई,करना पड़े न काम।

मिले बिना पैसे में सब कुछ,लगे न ठंडी  घाम।।

जोगीरा सारा रा रा रा


देह    बहाए    नहीं   पसीना,  भोज मलाईदार।

तनिक न हाथ पाँव भी झूलें,कृपा करें करतार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


सबक  सीखता मधुमक्खी से,नहीं आज  इंसान।

छप्पर  फ़टे और  मिल जाए,कर दे कोई   दान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


अपना    उल्लू  सीधा  करना,प्रायः यही     उसूल।

जैसे भी हो सिद्ध काम निज,कभी न जाते   भूल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


परजीवी  बन   लहू   चूसना,  इसमें परमानंद।

लेबल  बने  हुए  पर अपना, चिपकाना  निर्द्वंद।।

जोगीरा सारा रा रा रा


यहाँ न कोई अपना शुभदा,सब मतलब  के यार।

पैसे   बिना  न पूछे  कोई, हो  विद्वान    हजार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा संप्रति, सब चूल्हों  की एक।

माटी  सदृश  वही  मिलेगी, सोचो यह   सविवेक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


22.03.2024● 8.45प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:38 [जोगीरा ]

 140/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


टाँग  फ़टे  में  जिन्हें फाँसने,का होता   है  शौक।

करनी देख न अचरज करना,और न जाना चौंक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जिन्हें  सताने  में ही जन को,मिलता परमानंद।

दुखी देखकर हर्षित  होते, दुखपालक  आसंद।।

जोगीरा सारा रा रा रा


मानव  के  तन  में ही निर्मित,गीदड़ गर्दभ  शेर।

चूहा बिल्ली कछुआ मिलते,सब कर्मों का फेर।।

जोगीरा सारा रा रा रा


संस्कार  मरते  न  जीव के, मरती केवल  देह।

योनि- योनि में हुए  अंतरित,तदवत बदले   गेह।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


फेर बड़ा है सूक्ष्म जीव का,कुल चौरासी  लाख।

यात्रा-पथ पर चलता रहता,बनती मिटती  साख।।

जोगीरा सारा रा रा रा


सबसे अहं   कर्म  पथ तेरा, उसे न जाना  भूल।

सीढ़ी दर  सीढ़ी  चढ़ता जा,या मिल जाए   धूल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्'  कहें  जोगीरा  तेरे, क्षमा न तुझको  लेश।

आती है जब  मीच एक  दिन,उठा घसीटे   केश।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


22.03.2024●4.45प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:37 [जोगीरा ]

 139/2024

       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


देखी  झाँक न ग्रीवा  अपनी,कैसा चरित महान।

अँगुली  तान  दूसरों पर ही, इंगित किए निशान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


वसनों  के  नीचे  ढँक   लेते, अपने सारे  दोष।

दिखलाते  औरों की गलती,ऑंखों में भर रोष।।

जोगीरा सारा रा रा रा


दूध    दही    के   दरिया   बहते,नेता  करें   नहान।

धुली न अब तक मन की कालिख,कारागार प्रमान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


सदा  पटखनी देने की ही, विकृत जिनकी सोच।

कैसे करें  सशक्त  राष्ट्र  को, नित्य बनाते  पोच।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जिनके    बलबूते  पर जीता, मेरा देश    महान।

देशभक्ति  उनमें न  लेश भर,साँसत में हैं जान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


दलबंदी  का  दलदल  काला,  मामा वे   मारीच ।

कपड़ों  के  नीचे  आरक्षित,रहती जब तक मीच।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्'  कहें   जोगीरा  दर्पण,देखें नेता  झाँक।

भरी  मिलेंगीं  दुर्गंधें  ही,   केवल काली   पाँक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


22.03.2024●7.15आ०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:36 [जोगीरा ]

 138/2024

          


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


ख्यात जलाने  का  व्यसनी है,मेरा भारत   देश।

जलता कोई बिना आग  के,रहित शीश के केश।।

जोगीरा सारा रा रा


एक  पड़ौसी निकट पड़ौसी, से जल होता खाक।

लपट न कहीं धुआँ ही उठता,ऊँची करता नाक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


जलता नहीं  जलाया जाता,रावण भी प्रतिवर्ष।

लोग चीखते ताली  पीटें,  सहज मनाते   हर्ष।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बुआ   होलिका  अंक उठाए, भ्राता- सुत  प्रह्लाद।

फ़ागुन के पूनम को आती,ज्वलन दिवस की याद।।

जोगीरा सारा रा रा रा


करके   भीड़     इकट्ठी  भारी,उसे जलाते     लोग।

पता न जिनको इस करतब का,किंतु रूढ़ि का रोग।

जोगीरा सारा रा रा रा


पुतिन  जलाए   यूक्रेनों   को,   कैसा अत्याचार।

इजराइल हमास की ज्वाला,जलती है  हर  वार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्'  कहें जोगीरा ज्वाला,शीतल कहीं  ज्वलंत।

नाम अन्य का  मिटा  रहे हैं, कभी  न होंग      संत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


21.03.2024● 10.30प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:35 [जोगीरा ]

 137/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


'सम्मानों ' की   रेवड़ियाँ  हैं,  ले   लो रचनाकार।

बाँट रहे  हैं  अति सम्मानित,चिह्न सहित उपहार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शॉल नारियल साथ मिलेगा,गले फूल  का  हार।

नाम  छपेगा  अखबारों  में,नर हो या हो   नार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


छंदबद्ध  या मुक्त छंद हो,या कविता अतुकांत।

पूरा - पूरा मान  मिलेगा, मन में रहें न   भ्रांत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


अवसर किसे तुम्हें जो परखे,स्वर्ण कसौटी  मीत।

इतनी केवल गाँठ बाँध लो,तुम्हें मिलेगी   जीत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


बड़े - बड़े  भाषा   विज्ञानी, बन  जाते   खरगोश।

कछुआ  आए  प्रथम दौड़ में,सजग रखे जो होश।।

जोगीरा सारा रा रा रा


थोड़ा  तेल    लगाना  सीखो,  थोड़े मक्खनबाज।

क्या कारण  जो नहीं सजेगा,शीश तुम्हारे  ताज।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा कविवर,पड़े न कैसे   घास!

तुम्हें  सीखना  होगा प्यारे,खाना बिना    उपास।।

जोगीरा  सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


21.03.2024 ●8.45प०मा०

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गुरुवार, 21 मार्च 2024

शुभम् कहें जोगीरा:34 [जोगीरा ]

 136/2024

        


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


किसका दिल कितना काला है,अंदर की ये बात।

अपना उल्लू  सीधा  करने,  करे बड़े अपघात।।

जोगीरा सारा रा रा रा


दर्पण होता दिल मानव का,दिखलाता सत् चित्र।

पैसा ही माँ बाप मनुज का,तृण भर नहीं पवित्र।।

जोगीरा सारा रा रा रा


धोखे  से ही  पैदा होता,धोखा ही माँ बाप।

धोखे  से  ही देह छोड़ता,यही उसे अभिशाप।।

जोगीरा सारा रा रा रा


नर मुख की बाहरी बनावट,हो सकती  है  झूठ।

कब  कैसा  वह रंग दिखाए,बंद न कहती मूठ।।

जोगीरा सारा रा रा रा


आजीवन नारी का आँचल,नर का साया   एक।

बतला दे किसको न चाहिए,अपने सहित विवेक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा जन-जन, मन से  है  बीमार।

अंधकार  ही प्रिय निवास है,वही मात्र  परिवार।।

जोगीरा सारा रा रा रा

               

शुभमस्तु !

21.03.2024●3.15प०मा०

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शुभम् कहें जोगीरा:33 [जोगीरा ]

 135/2024

        


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बद  अच्छा  बदनाम  बुरा  है,  जैसे महिषी गाय।

महिषी  रानी  भैंस  हो गई,गौ मानव की   माय।।

जोगीरा सारा रा रा रा


अहसानों का जो न चुकाए,बदला वह नर हीन।

दूध भैंस का पी आजीवन,बनता मनुज प्रवीन।।

जोगीरा सारा रा रा रा


गैया   को  मैया   की  पदवी, रही उपेक्षित  भैंस।

बकरी भेड़ ऊँटनी का भी,पिया दूध हो   फैंस।।

जोगीरा सारा रा रा रा


कहा  गाय  को माता जी तो,पिता  तुम्हारा  साँड़।

महिषी माता को क्यों  भूला,शीघ्र बता दे भाँड़।।

जोगीरा सारा रा रा रा 


तन  समाजवादी  का झंडा,विडंबना के   बोझ।

तू लकीर का बस फकीर है,भरने का बस ओझ।।

जोगीरा सारा रा रा रा


भेदभाव  की  रीति  तुम्हारी,नीति न कोई    एक।

जिसकी लाठी भैंस उसी की,जाग्रत नहीं  विवेक।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें  जोगीरा  साँचे, साँचे में भर  बात।

दूध  भैंस का पी आजीवन,कहे गाय को  मात।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


21.03.2024●2.15प०मा०

शुभम् कहें जोगीरा :32 [जोगीरा ]

 134/2024

       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


विफल वफादारी  में  मानव,जब हो गया  अमित्र।

दिखा तभी  यह श्वान हमारा, सबसे शुद्ध  चरित्र।।

जोगीरा सारा रा रा रा


स्वागत अभिनंदन लिखते थे,पट्ट लगा  निज द्वार।

'रहें श्वान से सावधान'  अब,आवें निज   अनुसार।।

जोगीरा सारा रा रा रा


श्वानों  का  जब  मोल  बढ़ा  तो,पूछे नर को  कौन।

श्वान   कार डनलप  में रहते, संविधान   है   मौन।।

जोगीरा सारा रा रा रा


लगा समर्थन करने अपना,भाग्यवाद का  रूल।

जिसका जैसा भाग्य लिखा है,वैसा बना उसूल।।

जोगीरा  सारा रा रा रा


दूध  मलाई   रबड़ी    खाएँ,  नाटे तगड़े   श्वान।

मानव के शिशु तरस रहे हैं,नहीं दुग्ध का पान।।

जोगीरा सारा रा रा रा


श्वान आदमी   को   टहलाता, या इसके   विपरीत।

सुबह सड़क पर देख सको तो,देखो जग की नीत।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्'  कहें जोगीरा  कूकर, का बढ़िया  विश्वास।

व्यसन नहीं पाला है उसने, दारू गुटका   खास।।

जोगीरा सारा रा रा


21.03.2024●12.00मध्याह्न

शुभम् कहें जोगीरा:31 [जोगीरा ]

 133/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


तन रँगने  में क्या है गोरी,रँग ले मन को  आज।

तन तो धुल जाए पानी में,कर मन को रँग नाज।।

जोगीरा सारा रा रा रा


मन  रँगना  सिखलाए होली,वर्ष वर्ष की    बात।

रँगरसिया  का  नाम जगत में,जगती की सौगात।।

जोगीरा सारा रा रा रा


रँगता  कोई  राम भजन  में,कोई तिय   भुजबंध।

कोई धन की बाँध  पोटली,बना हुआ नित अंध।।

जोगीरा सारा रा रा रा


देश भक्त सीमा पर शोभित,रक्षक माँ का  लाल।

चमकाए शुभ नाम पिता का,माँ को करे निहाल।।

जोगीरा सारा रा रा रा


कोई बन  कर  जौंक चूसता,सोना चाँदी  धान्य।

कहता मैं नेता तुम सबका,करो  मुझे ही मान्य।।

जोगीरा सारा रा रा


कृषक  बहाता श्रमज पसीना,फिर भी भूखा पेट।

अन्न शाक  फल दूध दे  रहा, करें बहुत   से  हेट।।

जोगीरा सारा रा रा रा


'शुभम्' कहें जोगीरा रंगीं, होली  तो है  नित्य।

रँग  जा  बंदे  प्रेम  रंग में, सिद्ध करे औचित्य।।

जोगीरा सारा रा रा रा


शुभमस्तु !


21.03.2024●11.30आ०मा०

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किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...