nageet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
nageet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 9 अगस्त 2025

सड़क पड़ी इठलाए [नवगीत]

 416/2025


         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


टेढ़ी-मेढ़ी

बल खाती - सी

सड़क पड़ी इठलाए।


पूँछें पथिक

कहाँ को जाती

सड़क जरा बतलाओ

जाना हमको

गाँव श्यामपुर

हमें नहीं भरमाओ

जाती नहीं 

कहीं  ये चलकर

सड़क मौन बतलाए।


चलते राही

रात -दिवस सब

अचल अटल ये रहती

सदा मौन ही

धारण करती

शब्द न एकल कहती

कहीं खड्ड हैं 

इसमें गहरे

नागिन-सी लहराए।


कहीं किसानों ने

काटी है

ले जाने को पानी

करने को

सिंचन खेतों का

फसल उगेगी धानी

जो भी चले

 सड़क पर देखो

आकर के पछताए।


शुभमस्तु !


09.08.2025● 1.00प०मा०

                     ●●●

रविवार, 3 नवंबर 2024

क्या कीजिए! [ नवगीत ]

 497/2024

              

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जल गई रस्सी

न ऐंठन जा सकी

क्या कीजिए।


उम्र बीती

पार अस्सी कर लिया 

बुझता दिया है,

मोम होना था

जिसे पर हो सका क्या?

पत्थर का हिया है !

खाल लटकी

देह की

कुछ भीजिए।


दिखता नहीं है

आदमी हंकार में

बंद चमड़े के  नयन तेरे गले ,

खोल तो ले

ज्ञान का वह चक्षु भकुए

ढोर भी हैं आज तो तुझसे भले।

सत्य सुनकर

कान से क्यों रोष में

क्यों खीजिए?


दूसरों के ठौर पर

बैठा स्वयं को

कैसा लगेगा सोच तो ले आज !

ऊँट जाए जब

कभी पर्वत तले

गिर पड़ेगा भूमि पर सिर ताज,

सुन 'शुभम्' के

हाथ से हो ले  अलंकृत

यह लीजिए।


शुभमस्तु !


03.11.2024●12.15प०मा०

                ●●●

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...