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मंगलवार, 4 मार्च 2025

इडली के सँग सौंधी साँभर [गीतिका]

 130/2025

   

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


इडली  के  सँग  सौंधी  साँभर क्या कहने!

पूड़ी - रोटी   एक   बराबर    क्या कहने!!


हाथ-हाथ    में   मोबाइल    नर-नारी   के,

गली -गली   में    ऊँचे   टावर क्या कहने!


आई ए एस    की   करें  पढ़ाई कोचिंग  में,

कंधे  पर   कुछ    धरते  काँवर क्या कहने!


बिना  पढ़ों  के  सँग   में   पी ए  अधिकारी,

नेताजी   की     ऊँची   पावर   क्या कहने!


मात-पिता  की  करें   न   सेवा 'जलकुंभी',

गोता    ले-ले   करें    उजागर   क्या कहने!


मरती   नहीं   हाथ   से  माखी तनते आप,

कहलाते   हैं  स्वयं   गदाधर    क्या कहने!


'शुभम्'   रंग    दुनिया  के   कैसे-कैसे   हैं,

मूढ़  लोग हैं   नित्य   निछावर  क्या कहने!


शुभमस्तु !


01.03.2025● 11.15आ०मा०

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रविवार, 16 अक्टूबर 2022

बोया कैसा बीज 🎋 [ गीतिका ]

 415/2022

 

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✍️ शब्दकार ©

🏕️ डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्'

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मनमानी    की     ठानी     है।

घर  -  घर   खींचातानी    है।।


संतति     चले   कुराहों    पर,

सूखा    दृग  का   पानी     है।


बोया   कैसा      बीज     बुरा,

कँदुआ      कारस्तानी       है।


तब  तो  एक    विभीषण  था,

अब    घर -  घर में   घानी  है।


उर  में     आँसू     की    बाढ़ें,

जनक   -  लाज   मुरझानी है।


लखन   भरत   अब  सपने हैं,

खल  की  खाज  खुजानी  है।


'शुभम्' पूज्य  अब के रावण,

नहीं  राम     की   बानी    है।


🪴 शुभमस्तु !


16.12.2022◆10.45 आरोहणम् मार्तण्डस्य।


किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...