बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

बीती हुई कहानी है [ ग़ज़ल ]

 061/2026


       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बीती     हुई       कहानी    है।

फिर  भी   याद   जबानी   है।।


अनगिन    बीत     गई     बरसें,

पर  वह      नहीं   पुरानी      है।


छोटी   भी     छोटी      न    लगे,

वह   सब     आज     बतानी  है।


जो  सोचा      था    नहीं    हुआ,

बात      वही     समझानी     है।


काम  निकाला        चले     गए,

कहन    लगे       बचकानी    है।


उठापटक     सब     याद    रही,

मगर   नहीं      उलझानी      है।


है      खुदगर्ज़       जमाना      ये,

बाकी    नहीं        निशानी      है।


शुभमस्तु !


01.02.2026◆10.15 आ०मा०

                    ◆◆◆

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