064/2026
समांत :अट
पदांत : अपदांत
मात्राभार : 16.
मात्रा पतन : शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
शुद्ध बनाओ निज अन्तर्घट।
नहीं उघाड़ो प्रिय अन्तर्पट।।
उर में वास करे जो प्रति पल।
नाम उसी का ले क्षण- क्षण रट।।
निज सतपथ से मत विचलित हो।
एक इंच भी तू न कभी हट।।
सब चलते हैं अपने पथ पर ।
चलता रह तू करे न खट-खट ।।
छलके नहीं बूँद भर पानी।
सँवर -सँवर कर ले चल ये घट।।
अभिनय में सब लगे हुए हैं।
तू भी बना हुआ मंचन-नट।।
'शुभम्' दृष्टि-पथ हो न धुँधलका।
आने मत दे दृग पर ये लट।।
शुभमस्तु ,
02.02.2026◆6.00आ०मा०
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