384/2026
समांत : अण
पदांत : अपदांत
मात्राभार : 26.
मात्रा पतन : शून्य
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
राम नाम से रमता कण-कण।
हमें राम से शुभ आकर्षण।।
थिरता नहीं लेश जगती में।
रूप रंग परिवर्तित क्षण-क्षण।।
क्षीण हो रही है मानवता।
दानवता से कंपित तृण -तृण।।
लगे सताने लोग अन्य को।
नोंच रहे हैं वे रिसते व्रण।।
रावण ध्वंश तभी हो पाए।
जब हो जाए राम-अवतरण।।
राजनीति का रावण देखो।
सता रहा है सारा जनगण।।
'शुभम्' अमोलक मानव जीवन।
नहीं लगाना इसको तू पण।।
शुभमस्तु,
01.11.2026◆10.45 प०मा०
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[11:01 pm, 1/11/2026] DR BHAGWAT SWAROOP:
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