320/2026
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डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जग कहता करतार,प्रभु जी आप महान हो।
हिले न पल्लव भार,बिना कृपा के आपकी।।
करती कृपा अनंत, एक निमिष करतार की।
रत मानव बहु संत, जन्म -मृत्यु के खेल में।।
जो जग में बस एक,नमन करूँ करतार को।
जाग्रत रहे विवेक, रमू अहर्निश भक्ति में।।
जो जग का करतार,भूल न जाऊँ ईश को।
जगती का उपहार ,मुझको नर जीवन दिया।।
उठ प्रतिदिन प्रति भोर, आओ हम वंदन करें।
चलें उन्हीं की ओर,कर्ता प्रभु करतार हैं।।
कर्ता के वरदान, अन्न दुग्ध फल फूल हैं।
पोषण जीव प्रधान, कृपा बड़ी करतार की।।
बचा न कुछ भी शेष,भुला दिया करतार को।
भ्रमें न बनकर मेष, हो कृतज्ञ उस ईश का।।
रहे जीव सब भोग, बहुजीवी संसार में।
करे न निमिष वियोग , सर्वश्रेष्ठ करतार ही।।
मान सदा उपकार, हो कृतज्ञ करतार का।
महिमा अपरंपार ,क्षण-क्षण तू भूले नहीं।।
पौधे लता अनंत, शहर गाँव पर्वत नदी।
पावस शीत वसंत, सृजन सभी करतार के।।
सृष्टा- दृष्टा नेक, नाम बड़ा करतार का।
जाग्रत करें विवेक, उसके नाम अनंत हैं।।
शुभमस्तु,
01.10.2026◆6.30 आ०मा०
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