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©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
मनती करवा चौथ, देश में भाभी ताई।
पत्नी साली आज,कर रहीं साफ़- सफ़ाई।।
घर-घर में उल्लास,छा रहा अनुपम ऐसा।
सोने की बरसात,हो रही है कुछ वैसा।।
-2-
हाथ -पाँव में लेप, हिना की लिपि मनहारी।
बिसर गईं तन पीर, मिटीं सारी बीमारी।।
बढ़े आयु की बेल, जिए पति सौ-सौ बरसों।
करवा चौथ न भूल, बो रही प्रेमिल सरसों।।
-3-
सजा रहीं निज देह,करें शृंगार सजीले।
करवा चौथ महान, अंग हैं बने छबीले।।
नारी पर्व अनूप, देश में हिन्दू नारी।
मना रहीं सह प्रेम, रहें पति सदा सुखारी।।
-4-
भारत देश महान, प्रथाएँ यहाँ हजारों।
मना रहे नर-नारि, गेह सब सड़क बजारों।।
उनमें करवा चौथ, एक है पर्व निराला।
पियें न दिन भर नीर, नारियाँ भखें निवाला।।
-5-
आई करवा चौथ, मनाती हिंदू नारी।
स्वच्छ करें घर -द्वार, करें भरसक तैयारी।।
तन-मन सजा अनूप, षोडसी-सी वे झूमें।
नई शाटिका धार, परी-सी अंबर चूमें।।
शुभमस्तु,
29.10.2026◆8.00 आ०मा०
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