231/2026
समांत : अम
पदांत : अपदांत
मात्राभार : 16.
मात्रा पतन : शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
चोर-उचक्के ठोक रहे खम।
बोल रहे रसना से बम-बम।।
बाहर बैठा चोर-सरगना।
उसके ऊपर भीतर भी दम।।
राम-धाम में चोरी होती।
चोर नहीं होते लेकिन कम।।
भाल तिलक तन पर पीताम्बर।
मधुशाला में वे पीते रम।।
कहते यही कौन क्या कर ले।
सर्वेसर्वा मंदिर के हम।।
नाक अवध वालों की कटती।
चोर खा रहे रबड़ी चमचम।।
'शुभम्' लिखे कविता चिल्लाए।
किंतु न होना चोरों को गम।।
शुभमस्तु,
05.07.2026◆10.30 प०मा०
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