रविवार, 12 जुलाई 2026

गुंडत्त्व [ अतुकांतिका]

 225/2026


            


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


गुंडत्त्व के गुरुत्व से

गौरवान्वित जन

गुरूर में गुम हैं,

आम चूषण के वास्ते

एटम बम हैं।


कोई मंदिर में

कोई संसद में

गली सड़क बाजारों में

कमी नहीं

वर्चस्व ही है इनका।


परदे की आड़ में

कैमरा जाए भाड़ में

ये कर्म नहीं

कांड करते हैं,

करोड़ों की लूट से

अपना घर भरते हैं।


गुंडत्व से

सबको भय है

इसीलिए यहाँ

छाया अनय है,

मानवता का क्षय है

देश और दुनिया की

आज यही लय है।


महा गुंडत्व के 

वटवृक्ष के तले

दूब भी नहीं उगती,

पर अंततः

सभी चंपतों की

पोल खुलनी है,

खुल ही रही है,

बकरे की अम्मा अंततः

कब तक सिन्नी बाँटेगी!


धर्म का मंदिर

दूषित करने वाले

जड़ें जमाए बैठे हैं,

उँगली नहीं 

उठा सकते आप

वे ऐसे तने ऐंठे हैं।


दूध और पानी

छंट रहा है,

दूध देखिए 

दूध की धार देखिए,

अपनी ही आँखों के समक्ष

पापियों का उपसंहार देखिए।


शुभमस्तु,


03.07.2026◆530आ०मा०

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