शनिवार, 16 मई 2026

मरीचिका [ अतुकांतिका ]

 156/2026


            

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


ममता मोह की मरीचिका

इतनी भी अच्छी नहीं 

कि सत्य का गला घोंट दें

नैतिकता को तिलांजलि देकर

सदाचरण को छोड़ दें।


न पंचों की मानूँगी

बस रार ही ठानूँगी

अपने विगत किए धरे पर

हार नहीं मानूँगी

कुर्सी मेरी बपौती है

शांति तहस-नहस कर डालूँगी।


खूँटा वहीं पर गड़ेगा

करूँगी वही जो 

मेरा मन जिद करेगा

आखिर तो एक

जिद्दी  नारी हूँ

सचल बीमारी हूँ।


सब गलत हैं

सही तो बस एक मैं

करती रहूँगी

इसी तरह चिल्ल पों

खों खों खों खों खों

झों झों झों झों झों।


हारी नहीं हूँ मैं

हराया गया है

शक्ति के अंचल में

डराया गया है

हार नहीं मानूँगी।


नारी हठ

राज हठ

दोनों ही हैं मेरे पास

लड़कर ले लूँगी

इसका है विश्वास,

फैलता है तो फैलता रहे

रायता इस देश में,

करेला 

फिर नीम चढ़ा।


शुभमस्तु,


08.05.2026◆ 5.45 आ०मा०

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