233/2026
समांत : अड़े
पदांत : हैं
मात्रभार :16.
मात्रा पतन : शून्य
चिकने-चुपड़े लाल घड़े हैं।
लिए पताका सभी खड़े हैं।।
डाल रहे मंदिर में डाका।
हठ पर अपनी अड़े पड़े हैं।।
बाँट मुबाइल प्रेयसियों को।
ऐयासी में कनक जड़े हैं।।
खा अकूत धन लीं न डकारें।
ऊँचे-ऊँचे भाव कड़े हैं।।
रामालय को बेच कमाते।
सोना -चाँदी घूर गड़े हैं।।
बड़े-बड़ों की छाया छादित।
जिनके मानस मगर सड़े हैं।।
'शुभम्' धर्म से धंधा करते।
पाप कमाते बड़े -बड़े हैं।।
शुभमस्तु,
13.07.2026◆ 5.15 आ०मा०
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