शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

सीख' [ अतुकांतिका ]

 290/2026


          


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


कितनी ही 

दुर्विनीता माताओं ने

अपनी ही 

जायाओं के

अपनी 'सीख'  से

घर बर्बाद किए हैं,

दोष सासों पर

मढ़ा गया

और मूर्खा 

बेटियों ने

अपने ही हाथ

आग में 

झुलसा लिए हैं।


पति और सास से

भिड़वाया

मोबाइल पर

संदेश भिजवाया

कोई काम 

मत करना,

कुछ भी कहे

अगर सास- ननद

तो एक की

चालीस कहना,

पीछे मत रहना।


जलती हुई आग में

एक चिनगी ने

बड़ा काम किया,

पति-गृह को उजाड़ कर

सास-ननद को 

बदनाम किया,

जबकि चाबी 

कहीं और से ही

भरी गई,

नई बनी गृहस्थी

माँ के हाथों

उजाड़ी गई।


एक नहीं

हजारों निदर्शन 

विद्यमान हैं,

जहाँ माताएँ ही

बेटियों की दुश्मन हैं

कमान हैं,

पर मूर्खाओं को

कोई समझा भी 

तो नहीं सकता।


शुभमस्तु,


18.09.2026◆5.15आ०मा०

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