शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

विजय रथ देखो आए! [ गीतिका ]

 324/2026


       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जय  लोकतंत्र की बोल,विजय रथ देखो  आए।

बज रहे सड़क पर ढोल, विजय रथ देखो आए।।


रेवड़ियों   की     महक,  फ़िज़ाओं    में घुलती है,

मतमंगे  कुछ बकलोल,  विजय  रथ देखो  आए।


मत   चूक  आज  चौहान, कुंभ  का पर्व नहा ले,

कपड़े दे तन के  खोल, विजय  रथ  देखो आए।


पूरब    से     पश्चिम      देख,   सभी  ललचाए,

धरती सब अपनी गोल, विजय रथ  देखो आए।


तैरती       मलाई      श्वेत,   छोड़     मत   देना,

इसके  नीचे    है   पोल, विजय रथ देखो आए।


चलता    नित    कीचड़   खेल,   खेलते होली,

अब अवसर है अनमोल, विजय रथ देखो आए।


जो  कहें 'शुभम्'   मत  मान, सत्य वह  कितना,

इनकी  वाणी   में झोल, विजय  रथ देखो आए।


शुभमस्तु,


02.10.2026 ◆1.30 आ०मा० (रात्रि)

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