गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

जग कहता करतार [ दोहा ]

 319/2026


      


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


प्रभु जी आप महान हो, जग कहता करतार।

बिना कृपा के आपकी, हिले न पल्लव भार।।

एक निमिष  करतार की,करती  कृपा अनंत।

जन्म- मृत्यु  के खेल  में,रत मानव बहु संत।।


नमन करूँ करतार को,जो जग में बस एक।

रमू  अहर्निश  भक्ति में, जाग्रत   रहे विवेक।।

भूल न जाऊँ ईश  को, जो  जग का करतार।

मुझको नर  जीवन दिया,जगती का उपहार।।


आओ हम वंदन करें,उठ प्रतिदिन प्रति भोर।

कर्ता  प्रभु करतार  हैं, चलें  उन्हीं   की ओर।।

अन्न   दुग्ध  फल   फूल हैं,  कर्ता  के वरदान।

कृपा  बड़ी  करतार  की,पोषण जीव प्रधान।।


भुला दिया करतार को,बचा न कुछ भी शेष।

हो कृतज्ञ   उस ईश  का,भ्रमें न बनकर मेष।।

बहुजीवी   संसार    में , रहे  जीव   सब भोग।

सर्वश्रेष्ठ  करतार  ही,करे  न  निमिष वियोग।।


हो कृतज्ञ   करतार  का, मान   सदा उपकार।

क्षण -क्षण  तू भूले  नहीं, महिमा अपरंपार।।

शहर   गाँव   पर्वत   नदी, पौधे   लता अनंत।

सृजन  सभी  करतार के, पावस शीत वसंत।।


नाम    बड़ा    करतार  का,   सृष्टा- दृष्टा नेक।

उसके नाम   अनंत   हैं,   जाग्रत   करें विवेक।।


शुभमस्तु,

01.10.2026◆6.30 आ०मा०

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