323/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
'विज्ञापन' प्रधान देश में
'कार्यक्रम' का काम कहाँ !
विज्ञापन से ही तो है आय
चलता कुल व्यवसाय
अब पीओ चाहे कॉपी
अथवा कड़ी चाय ।
विज्ञापन ही दिखाना है
वही देखना भी है,
कार्यक्रम का क्या ?
वह तो क्षणिक है,
विज्ञापन ही वणिक है।
टीवी यही सीख देता है -
चैनल पर चेनल बदलना
बड़ा ही सुख देता है,
टीवी की यही तो कहानी है,
आजकल की नहीं
बड़ी पुरानी है।
जनता को मूर्ख बनाने के
बहुविध साधन हैं,
उनमें है एक टीवी
जो कार्यक्रम प्रधान नहीं
विज्ञापन प्रधान है,
वही टीवी की जान है
मेरा भारत महान है,
आधुनिकता का वरदान है,
घर -घर में तना वितान है।
करेगा भी क्या आम आदमी
जैसा भी है
सब स्वीकारना है
विज्ञापन को चाहना है
कार्यक्रम को दुत्कारना है,
मुस्कराकर चाहना है
मुँह फाड़ पुकारना है:
'चलते रहो विज्ञापन
मत दिखाओ कार्यक्रम।'
शुभमस्तु,
01.10.2026 ◆9.15 प०मा०
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