256/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
दूसरों के हाथ पर सवार
करने लगे हैं बाज क्यों शिकार
स्वजनों का
अपनी ही जड़ों को काट
कर रहे हैं ठाठ
अपना ही सर्वनाश
करने पर तुले हुए कनाश।
मर गया आँख का पानी
बरबाद करने को
मिली राजधानी
संसद और संसद पथ
जंतर मंतर पर चढ़े दुर्मति।
पढ़े -लिखों के लिए
अपढ़ों का हिंसक हंगामा
अमेरिका का दिया हुआ
फटा पाजामा
नकलियों द्वारा
असली का बैनामा?
वाह रे मतिमंदो !
पढ़े-लिखे गुंडो ! मुस्टंडो।
इनके माँ-बाप भी क्या हैं !
बची नहीं आँखों में हया है !
अपनी ही औलाद को
झोंक रहे भाड़ में
अमरीका की आड़ में,
भविष्य करवाते बरबाद
तिलचट्टे कभी हुए हैं आबाद?
दुर्बुद्धि एक मिसाल है
आहूत करते अपना ही
काल हैं,
कमाल है !
बेमिसाल है,
आज देश का ये हाल है!
सद्बुद्धि दें प्रभु जी इन्हें।
शुभमस्तु !
07.08.2026◆6.58 आ०मा०
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