262/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
देखने में पारदर्शी है, कहलाता रिफाइंड है,
सूँघने को नहीं देशी घी, यहीं सैट माइंड है,
जलेबियाँ कचौड़ी समोसा पूरियाँ,
घेवर का ढेर लगा, स्वाद बड़ा काइंड है।1।
शौक से ज़हर का, सेवन करवाते हैं,
खुद भी तो करते हैं, मरते हैं मरवाते हैं,
मधुमेह हृदय रोग, मिलते हैं तोहफ़े में,
जी-जान के दुश्मन, कैसे- कैसे इतराते हैं।2।
मिठाइयाँ पकवान, सब रिफाइंड के जाए,
त्यौहार ब्याह शादी,सब तल-तल पकाए,
खुली हुई आँख, विष आहार करना है,
जन्मदिन तेरहवीं, रिफाइंड से मनाए।3।
कोई रोक-टोक नहीं, विष- पान कीजिए,
नील हृदय नील वृक्क,नाम निज लीजिए,
सरकार भी क्यों भला, रोकेंगीं आपको,
सरसों का तेल छोड़, रिफाइंड पीजिए।4।
रिफाइंडी आहार की, रिफाइंड नई पीढ़ी है,
जलती है थोड़ी देर, बुझी हुई बीड़ी है,
भूल गए गोघृत गोरस, काल के हाथों में,
भूत भविष्य वर्तमान, पीढ़ी गई मीढ़ी है।5।
शुभमस्तु,
14.08.2026◆10.30आ०मा०
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