शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

तिरंगे का मजा लो [मुक्तक]

 261/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अब      तक   रहा   जो   अत्यंत  खास,

कर दिया   गया  उसका    बड़ा उपहास

सड़क -सड़क गलियों का आम  हो गया,

अवमानना देखकर मन हो गया उदास।।1।।


ऊँचे   आसमान      में  लहराता    है तिरंगा,

कर दिया गया  है उसे  भी आदमजात नंगा,

टपरी   पर        छप्पर      पर   ट्रैक्टर    पर,

दंगाइयों के   हाथ में    हो   रहा   नित्य दंगा।।2।।


आन   बान   शान   का    प्रतीक  था तिरंगा,

बहती    थी   देश   में   नित  प्रेम  की गंगा,

आज  वह   गङ्गा    भी   मैली    हो  गई है,

केरलम्   यूपी   हो  या  जम्मू -कश्मीर बंगा।।3।।


कहाँ   गई    राष्ट्रभक्ति     कोरा   मत   तंत्र है,

तिरंगा हुआ   आम   वस्त्र   फैशन   का मंत्र है,

नेताओं     के    वोट    की  पक्की सड़क एक,

स्वेच्छाचारी  भारत    का   डंडासीन यंत्र है।।4।।


"ब्लैकमेल   करना   हो   तो  तिरंगा उठा लो,

सौगन्ध   दिला   झंडे की  अरमान  सजा लो,

नेताओं   को   ट्रम्प    कार्ड   भुनाना   ही है,

जब   तक   जैसे  लो   तिरंगे   का मजा लो।।5।।


शुभमस्तु,


14.08.2026◆ 9.45 आ०मा०

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