260/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आया है सुअवसर
देशभक्ति के
प्रदर्शन का,
छोड़ना नहीं है
बस तिरंगा
लहरा दो।
छत हो
कि छप्पर हो
अट्टालिका
या टप्पर हो
गाड़ी हो
बंगला हो
महानगर
या नगला हो,
प्रदर्शन ही तो है।
कितनी है राष्ट्रभक्ति !
स्वदेश के प्रति अनुरक्ति !!
जिसका खाते अन्न जल
उसके कृतज्ञ तो हो लेना,
अन्यथा सब ढोंग ही होगा।
पहले तिरंगे के
नियम और विधान जानो
गिरे नहीं धरती पर
मत फटा हुआ तानो,
मत बनो लकीर के फ़क़ीर
आदमी हो नेता हो
पाजामा हो
या वजीर,
सभी तिरंगे के नीचे हैं।
किसे पड़ी है आज देश की
बस दिखावा जरूरी है,
अपना उल्लू होता रहे सीधा
करते रहो जी हुजूरी है,
भीतर जाके चाहे
चढ़ावा चुराओ
प्लॉट खरीदो
भवन बनवाओ
बीबियों और प्रेयसियों को
खुश करवाओ
बस झंडा ऊँचा रहे हमारा,
वाह रे रामभक्तो !
वाह रे देशभक्तो !!
जब किया है कर्मकांड
तो भुगतो ही भुगतो।
शुभमस्तु,
14.08.2026◆6.00आ०मा०
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