259/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
देखभाल अपने
अंडों की
करती चिड़िया एक।
पल्लव-तृण से
स्वयं बनाया
सुघर डाल पर नीड़
रहती है
निज पिया चिड़ा सँग
जहाँ न कोई भीड़
कुशल चितेरी
चिड़िया भोली
रखती विमल विवेक।
नहीं हानि हो
सर्प आदि से
रखती इसका ध्यान
भोर हुआ
नित चीं-चीं करती
सूर्य उदय का गान
हानि नहीं
पहुँचाती किंचित
भाव भरे उर नेक।
चारों ओर
घनी हरियाली
शांत सौम्य परिवेश
वर्षा का जल
नहीं टपकता
भय न शेष लवलेश
अपने में
मतवाली गाए
करती नित अभिषेक।
शुभमस्तु,
11.08.2026◆10.30आ०मा०
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