शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

देखभाल अपने अंडों की [ गीत ]

 259/2026


  


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


देखभाल अपने 

अंडों की 

करती चिड़िया एक।


पल्लव-तृण से

स्वयं बनाया 

सुघर डाल पर नीड़

रहती है

निज पिया चिड़ा सँग

जहाँ न कोई भीड़

कुशल चितेरी

चिड़िया भोली

रखती  विमल विवेक।


नहीं हानि हो

सर्प आदि से

रखती इसका ध्यान

भोर हुआ

नित चीं-चीं करती

सूर्य उदय का गान

हानि नहीं

पहुँचाती किंचित

भाव भरे उर नेक।


चारों ओर

घनी हरियाली

शांत सौम्य परिवेश

वर्षा का जल

नहीं टपकता

भय न शेष लवलेश

अपने में

मतवाली गाए

करती नित अभिषेक।


शुभमस्तु,


11.08.2026◆10.30आ०मा०

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