075/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जल रहे
टायर पुराने
आँच से डरना नहीं है।
कह रहे
वे चाँद सूरज
और सब तारे अधूरे
मात्र उनमें
रौशनी है
करकटों के अन्य घूरे
बात है
सच्ची खरी तो
साँच से डरना नहीं है।
नव प्रयोगों
के लिए
वे सचल शाला स्वयंभू
कोष वे
नव रूपकों के
कान में करते कभी कू
अगर हीरा
पास हो तो
काँच से डरना नहीं है।
दंभ इतना
और कोई
पालता मन में नहीं है
अन्य कह दे
गलत है सब
वे कहें सब कुछ सही है
आँधियों के
वे झकोरे
टांच से डरना नहीं है।
शुभमस्तु,
05.02.2026◆ 2.15 प०मा०
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