गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

समय ने सब कुछ गहा [ नवगीत ]

 071/2026

    

       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


समय बदला

समय ने 

सब कुछ गहा।


तर्जनी-स्पर्श से 

कविता

डिजीटल हो गई,

नोटबुक वह

लेखनी

किस ओर जाकर सो गई,

पर्दा 

मोबाइल का

उजेरा  कह रहा।


श्याम अक्षर

शब्द भी

 साकार है,

पटल उजला

काव्य का

 आधार है,

भाव उर का

आज  यों

अविरल बहा।


किस दिशा में

आज हम सब

जा रहे

विज्ञान के

नवरंग

ये जतला रहे

शब्द आखर में

नहीं 

जाता कहा।


शुभमस्तु ,


05.02.2026◆12.15 प०मा०

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