रविवार, 4 अक्टूबर 2026

राजनीति में [ गीतिका ]

 328/2026


            

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


कोई  नहीं  किसी का होता,राजनीति में।

खूँटे  के  सब  रट्टू  तोता,  राजनीति  में।।


छल - धोखे  से करें सजावट नेता  अपनी,

घड़ियाली  आँसू  वह रोता, राजनीति  में।


कुर्सी की खातिर करवा लो इनसे कुछ भी,

बंजर में  रसाल  फल बोता, राजनीति में।


इधर   रुपैया   सबसे  प्यारा  बाप  न बेटा,

लगा  रहा  गंगा  में   गोता,  राजनीति  में।


नीति नियम सिद्धांत जुबाँ पर रहते हरदम,

ग्लिसरीन  से  आँखें  धोता, राजनीति  में।


कहता  देशभक्त  क्या मुझ सा कोई  होगा,

चरित और नैतिकता खोता, राजनीति में।


'शुभम्' दूध का धोया मुझको मिला न कोई,

पानी से   घृत  नित्य   बिलोता,राजनीति में।


शुभमस्तु,


02.10.2026◆6.30 प०मा०

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