गुरुवार, 5 नवंबर 2026

धन [ रोला ]

 391/2026


               


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

धन है   मनुज   शरीर, रहे यदि सदा निरोगी।

करे सदा शुभ   काज, करें  ज्यों कर्मठ योगी।।

रखिए    सदा   सँवार,   बनाए वर्षों   रखना।

जीवन का हर स्वाद, मनुज को मीठा चखना।।


                         -2-

शुभ   धन तेरस   आज, खरीदें  सोना-चाँदी।

धन्वंतरि     भगवान,     पूजते  दादा -दादी।।

रौनक देख  अपार, हर्ष  मन  में अति आया।

भरे कहीं   भंडार,   कहीं बस धन की छाया।।


                         -3-

करें   नहीं   सत्कर्म, चाहते  धन मिल जाए।

रखे   हाथ   पर   हाथ, विराजे  वे ललचाए।।

कैसे   हो  मन   साध, पूर्ण   तेरी  रे मानव।

करे नीच ही  काम,रहा  है  निशिदिन  दानव।।


                         -4-

धन   धन   धन का मंत्र,नहीं देता धन भारी।

कर्मठ    बनें    सुजान, नहीं   तेरी  लाचारी।।

होंगे   कर्म  महान, नहीं  अभाव हो धन का।

बनी रहेगी शान, धनिक बन मानव मन का।।


                         -5-

नहीं    पूछता   बात,   बिना धन कोई तेरी।

मिले न जग में  मान, पड़े  भी विपद घनेरी।।

पूजनीय   वे लोग, जगत   में सब धन वाले।

करें   कर्म   वे   श्रेष्ठ, सदा   ही रहें   निराले।।


शुभमस्तु,


04.11.2026◆8.00 आ०मा०

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