गुरुवार, 5 नवंबर 2026

ज्ञान सिखाते वे ही हमको [ नवगीत ]

 389/2026


      

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


ज्ञान  सिखाते

हमको वे ही 

जिनको हमने ज्ञान सिखाया।


नौबत ऐसी

कभी न आए

कोई हमको सीख बताए

गिरें न अपने

पद से नीचे

वक्त न हमसे भीख मँगाए

विपदा पड़ी

हरिश्चन्द्रों पर

राजपाट सब ठाठ गँवाया।


काल चक्र

पलटा जब खाता 

उलट-पुलट हो जाता सारा

कंटक जो

ऊपर था पहले

नीचे जाकर टाँग चियारा

अनहोनी जब

घटनी होती

समय फलन क्या-क्या न दिखाया।


कालचक्र के नीचे

सारी

दुनिया मस्तक झुका रही है

आगे-आगे

काल हमारे

कभी किसी को रुका नहीं है

हमको तुमको

चलना केवल

पतन  वहीं जो काल गँवाया।

शुभमस्तु,


03.11.2026◆1.00प०मा०

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