389/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
ज्ञान सिखाते
हमको वे ही
जिनको हमने ज्ञान सिखाया।
नौबत ऐसी
कभी न आए
कोई हमको सीख बताए
गिरें न अपने
पद से नीचे
वक्त न हमसे भीख मँगाए
विपदा पड़ी
हरिश्चन्द्रों पर
राजपाट सब ठाठ गँवाया।
काल चक्र
पलटा जब खाता
उलट-पुलट हो जाता सारा
कंटक जो
ऊपर था पहले
नीचे जाकर टाँग चियारा
अनहोनी जब
घटनी होती
समय फलन क्या-क्या न दिखाया।
कालचक्र के नीचे
सारी
दुनिया मस्तक झुका रही है
आगे-आगे
काल हमारे
कभी किसी को रुका नहीं है
हमको तुमको
चलना केवल
पतन वहीं जो काल गँवाया।
शुभमस्तु,
03.11.2026◆1.00प०मा०
◆●◆
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें