बुधवार, 11 मार्च 2026

सदा कर्म हैं साथ हमारे [ गीतिका ]

 104/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सदा   कर्म     हैं     साथ     हमारे।

जीव    जिएं     सब   कर्म-सहारे।।


कर्म      योनि    के   दाता     होते,

कर्म     चमकते     बनकर    तारे।


कीट मनुज   खग   जलचर  नाना,

कर्माश्रित    हैं      थलचर    सारे।


स्वर्ग-नर्क     कर्मों       से     बनते,

मधुर  नीर     या     सागर   खारे।


निशा दिवस सम  जन का जीवन,

सघन तमस  रवि  के    उजियारे।


सत्कर्मी  सुख - शांति      भोगता,

कर्मों  के  फल     टरें      न  टारे ।


बुरे  कर्म      से      डूबे      तरणी,

'शुभम्'  कर्म    नित  जीव  उबारे।


शुभमस्तु,


09.03.2026◆4.30 आ०मा०

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