098/2026
समांत : आल
पदांत :अपदांत
मात्राभार :24.
मात्रा पतन :शून्य
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
कुहू -कुहू कोकिल करे,फागुन मास धमाल।
डफ-ढोलक बजने लगे,उड़ने लगा गुलाल।।
बरसाने की राधिका, नंदगाँव के श्याम।
ब्रजबालाएँ साथ में, नृत्यलीन ब्रज बाल।।
होली के उल्लास में, मस्त लताएँ पेड़।
इठलाती यमुना नदी, बदल रही निज चाल।।
देवर -भौजी खेलते, मची हुई है धूम।
होली की खिलवाड़ में,लाल हुए हैं गाल।।
लाल अधर लाली लसी, बूढ़ा पीपल एक।
यौवन छाया देह में, बदल रहा है छाल।।
मन्मथ ले अंगड़ाइयाँ, चहक रहा हर ओर।
तितली भौंरे झूमते ,चहक उठी हैं डाल।।
'शुभम्' समा मधुमास का,जड़ चेतन रसलीन।
गेंदा पाटल झूमते, भरें कुकड़ कूं ताल।।
शुभमस्तु ,
02.03.2026◆5.15
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