मंगलवार, 17 मार्च 2026

फहरा नवल तिरंगा . [ गीत ]

 111/2026


       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अंबर धरती बीच

शून्य सँग

फहरा नवल तिरंगा।


प्राची में केसरिया

लहरे

कहता  रे जन जागो

तन -मन में

जो आलस व्यापित

उसे शीघ्र ही त्यागो

त्याग तपस्या

धर्म कर्म की

बहे सदा ही गंगा।


भू पर

हरे -भरे खेतों में

श्रमिक कर्म में लीन

खुशहाली का

वे प्रतीक हैं

भाव नहीं मन दीन

कोई रहे न

भूखा -प्यासा

तन से मानव नंगा।


श्वेत गगन में

खग दल उड़ता

हर लेता तम सारा

कलरव से

गुंजित है कण -कण

प्रसरित नव उजियारा

नव उल्लास

नवोदित प्रतिपल

तन-मन जन का चंगा।


शुभमस्तु,

17.03.2026◆9.00आ०मा०

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