मंगलवार, 31 मार्च 2026

नहीं घटा है [ सजल ]

 119/2026


           


समांत          : अटा

पदांत           : है

मात्राभार       :16.

मात्रा पतन     : शून्य.


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नील  गगन  की  विमल   छटा है।

नहीं  तनिक भी   कहीं  घटा   है।।


चैत्र मास   मधु    बाँटे    प्रतिदिन।

अलि   गुंजन   से   बाग  पटा  है।।


तपने    लगा   गगन    में     सूरज।

लटकी  वट  की सघन  जटा   है।।


ब्रह्म    मुहूरत    में     आ    चहके।

चिड़िया , प्रभु का नाम   रटा  है।।


वन   में   गए   भ्रमण   करने  हम।

मिला न  किंचित  एक    गटा   है।।


करती है   कल - कल  सुरसरिता।

नहीं  नीर     में     कहीं   भटा  है।।


राजा   है     वसंत   ऋतुओं    का।

'शुभम्'   यत्र   सर्वत्र    खटा    है।।


शुभमस्तु,


30.03.2026◆ 5.45 आ०मा०

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