106/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
कब तक
चुप होकर बैठोगे
यों घुटनों को टेके,
टेप लगा है
क्या होठों पर
स्वयं बने हो जेठे।
अपनी गलियों में
कुत्ता भी शेर
हुआ करता है,
बाहर नाक
रगड़ता अपनी
गीदड़ से डरता है।
बना स्वयंभू
दुनिया का जो
शहनशाह अपने को
नोबुल माँग
रहा फैलाए
उठा युगल वह कर दो।
रावण से भी
अधिक अहं का
चरम न देखा ऐसा
स्वयं थूक कर
चाट रहा है
अभिनय करता कैसा।
भारतवादी
बनना होगा
तोड़ें सब दीवारें
जाति धर्म
विनाश की जड़ हैं
तोड़ी सभी कगारें।
शुभमस्तु,
12.03.2026◆7.00आ०मा०
◆◆◆
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें