110/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आपदा में
अवसरों की खोज का
एक नाम है इंसान।
युद्ध हो
भूडोल हो
या बाढ़ का अतिचार
रक्तरंजित
लाश से भी
दानवी व्यवहार
कहता धरा पर
श्रेष्ठतम है
मानवी संतान।
मार कर
इंसान को
है बन रहा जो शेर
नाश के
सन्निकट है
बजता घना रणभेर
कीड़े-मकोड़ों सा
मसलता
विश्व है श्मशान।
आँख से अंधा
प्रभंजन
में उड़ाए तीर
विश्व को
दिखला रहा
वह शक्तिशाली मीर
शांति सुख
भाता नहीं
बहरे हुए हैं कान।
शुभमस्तु,
16.03.2026◆9.30 आ०मा०
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