शनिवार, 7 नवंबर 2026

धनतेरस [ अतुकांतिका]

 395/2026


                 

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


धन के लिए

मारामारी की प्रथा का

श्रीगणेश करने का दिन

धन तेरस।


किसी को चाहिए

सोना चाँदी वैभव

किसी को 

कुर्सी का उत्सव।


ज्ञान किसी की 

ज़रूरत नहीं,

वह तो सबके पास है,

जिसका जिसे अभाव है,

उसी का उसे चाव है।


धन अनेक हैं

धन को समझने का

अपना-अपना विवेक है

किसी के लिए कुछ है धन

किसी के लिए कुछ और।


किसी को संतान धन है

किसी को सम्मान धन है,

किसी को ऊपरी कमाई

सबसे बड़ा धन है,

उसने वेतन को निवेश माना है

उत्कोच पाने का उसका मन है।


धन के लिए पूजा-पाठ

हाट बाट नौकरी व्यापार 

राजनीति धर्म का ठेकेदार

बड़े-बड़े ठाठ,

उसमें ईमानदारी का

कोई स्थान नहीं,

सत्य का कहीं मान नहीं।


क्या यही उपलब्धि है

धन तेरस की ?

स्व हितार्थ बनाई गईं

प्रथाएँ परम्पराएं

 त्यौहार पर्व, 

आदमी कहता सगर्व।


शुभमस्तु,


05.11.2026◆10.00प०मा०

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