078/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
बनी काठ की
श्यामल तख्ती
किटकन्नों पर चलकर आया।
अ आ इ ई
उ ऊ ए ऐ
ओ औ अं अ: बारह आखर
क च ट त प
पंच वर्ग सब
य र ल व ह से बढ़कर
बावन की
संख्या कर पूरी
गिनती और पहाड़े लाया।
सूखी खड़िया के
किटकन्ने
चलती सरकंडे की कलमें
खड़िया घोल
दवातों में हम
रहते थे रोजाना हल में
एक- एक
अक्षर हम सीखे
अपनी मंजिल का पथ पाया।
जोड़-जोड़
अक्षर मात्राएँ
वाक्य बनाना आया जब से
भाषा ज्ञान
दिया गुरुवर ने
कविता लिखना आई तब से
कृपा शारदा
माँ की ऐसी
कविता का शृंगार सजाया।
शुभमस्तु,
07.02.2026◆4.00आ०मा०
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