शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

किटकन्नों पर चलकर आया [ नवगीत ]

 078/2026


   


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बनी काठ की

श्यामल तख्ती

किटकन्नों पर चलकर आया।


अ आ इ ई

उ ऊ ए ऐ 

ओ औ अं अ: बारह आखर

क च ट त प

पंच वर्ग सब

य र ल   व ह    से   बढ़कर 

बावन की

संख्या कर पूरी

गिनती और पहाड़े लाया।


सूखी खड़िया के

किटकन्ने

चलती सरकंडे की कलमें

खड़िया घोल

दवातों में हम

रहते थे  रोजाना   हल में

एक- एक

अक्षर हम सीखे

अपनी मंजिल का पथ पाया।


जोड़-जोड़

अक्षर मात्राएँ

वाक्य बनाना आया जब से

भाषा ज्ञान 

दिया गुरुवर ने

कविता लिखना आई तब से

कृपा शारदा 

माँ की ऐसी

कविता का शृंगार सजाया।


शुभमस्तु,


07.02.2026◆4.00आ०मा०

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