शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

किटकंनों की पगडंडी [ नवगीत ]

 079/2026


    

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


डॉट पैन

तब न थी नोटबुक

किटकंनों की पगडंडी।


एक हाथ में

तख्ती लटकी

कंधे पर बस झोला

नाम मात्र की

तीन किताबें

चंचल था मन डोला

पहुँचे जब 

शाला में अपनी

किटकंनों की पगडंडी।


इमला और

सुलेख रोज का

काम यही जो करना था

समय मिले तो

खिलंदड़ी भी

लिखने से कब डरना था

मुंशी जी

गिनती रटवाते

किटकंनों की पगडंडी।


गा- गाकर

समवेत पहाड़े

बैठ गोल में रटते थे

बीच-बीच में

मुंशी जी भी

प्रश्न सभी से करते थे

जँचवाते

अपनी इमला को

किटकन्नों की पगडंडी।


शुभमस्तु ,


07.02.2026◆4.45 आ०मा०

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