174/2026
समांत : इयाँ
पदांत :अपदांत
मात्राभार :16.
मात्रा पतन : शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
पूछ रहीं दुल्हन से सखियाँ।
लाज भरीं तव दृग की छवियाँ।।
ब्याह हुआ पति-गृह से लौटीं।
श्वसुरालय की कैसी गलियाँ।।
साथ मिला साजन का अनुपम।
लगी न होंगीं पल की सदियाँ।।
पायल मौन करधनी मुखरित।
गूँज उठीं होंगीं मधु ध्वनियाँ।।
रात-रात भर सो न सकीं तुम।
करती थीं क्या पति से बतियाँ??
फूट रहे हैं मन में लड्डू।
हमको भी जतलाओ खुशियाँ।।
'शुभम्' बताओ अनुभव हमको।
लिखती हो क्या अब भी चिठियाँ।।
शुभमस्तु,
31.05.2026 ◆10.30 प०मा०
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