शनिवार, 30 मई 2026

ठग रहा है कौन किसको [ ग़ज़ल ]

 166/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


ठग  रहा   है  कौन   किसको।

जानता    है   कौन    इसको।।


लोभ   का     लासा  लगा   है,

चाटती  है    जीभ    रस  को।


हमको    पता   इतना नहीं  है,

दाब ले कब   कौन   नस  को।


एक      अंधी      दौड़    जारी,

चाहता  निज जोम  जस   को।


कम     चतुर     कोई   नहीं   है,

जानते     रूखे - सरस      को।


बाल  सूअर    का     नयन   में,

आदमी      इस    बे तरस   को।


सड़क  दफ़्तर    में    खड़े    है ,

ठग - लुटेरे     पग -परस    को।


शुभमस्तु,


17.05.2026◆12.30 प०मा०

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