शनिवार, 30 मई 2026

ब्याह हुआ दुल्हन नई [ दोहा गीतिका ]

 172/2026

         

          ब्याह हुआ दुल्हन नई

                [ दोहा गीतिका ]


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


ब्याह हुआ दुल्हन नई,प्रिय लगती ससुराल।

मात-पिता   बैरी   लगें, घर  में  करें बवाल।।


बिगड़  गए   हैं  आज  के, बेटे   करें कुसंग,

सुरापान    करने   लगे,  लगे    बुरे ऐमाल।


सीख  न  मानें  बाप  की, भूले  सद आचार,

यौवन  जब  चढ़ने लगा,बदल  गई है चाल।


क्रीम लिपस्टिक  पोतकर,रूपसियाँ मदमस्त,

चाँदी-चाँदी   देह  है, महक    रही   है खाल।


जाते    पश्चिम  देश   को, बोल  रहे हैं  झूठ,

पहुँचें   पूरब   देश    में,  ठोक  रहे  हैं  ताल।


गरिमा  नहीं   चरित्र   की,  बढ़ता नित्य गुरूर,

पीढ़ी   नई  कुचाल   में, लीन  झुका है भाल।


'शुभम्' शेष आशा नहीं, बिगड़ गया भवितव्य,

देखी पथ में  कामिनी,   फैलाते    छल जाल।


शुभमस्तु,


25.05.2026◆7.00 आ०मा०

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