082/2026
समांत : ईर
पदांत : अपदांत
मात्राभार : 24.
मात्रा पतन : शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आहट विरल वसंत की,रँगे हुए निज चीर।
तन -मन वन -वन झूमती,सर सरिता के तीर।।
अमराई में गूँजते, कुहू-कुहू के बोल।
विरहिन बाट निहारती,टिके न उर में धीर।।
क्यारी में पाटल खिले,वन में टेसू लाल।
मह-मह-मह गेंदा करे, सरसों सरस अमीर।।
सरर-सरर चलती हवा,गलन भरी दिन-रात।
अरहर रह-रह झूमती, उड़ता लाल अबीर।।
फगुनाहट घुलने लगी, जड़-चेतन के बीच।
डफ-ढोलक की गूँज में,मस्त हुए नर वीर।।
दिन होली के आ गए,बालक करें धमाल।
उड़ता रंग गुलाल का,महका विरल उशीर।।
'शुभम्' गंध मलयानिली,तन-मन के हर पोर।
काम-बाण नित बेधती,जगा हृदय में पीर।।
शुभमस्तु,
09.02.2026◆7.45 आ०मा०
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