सोमवार, 24 अगस्त 2026

सब चूल्हे कच्ची माटी के [ अतुकांतिका ]

 267/2026


      


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


शादी से पहले

राखी बंधन त्योहार

भाई -बहन का प्यार,

बरसता हुआ लाड़,

खड़ा प्रेम का पहाड़।


शादी के बाद

सास-ससुरे से रार

देवर से जेठ पर प्रहार

आँगन के बीच खड़ी

ऊँची लंबी दीवार।


नव रात्रि की देवियाँ

विदा देवित्व हुआ,

ससुरालय में 

बँटवारे का

 खुदवा दिया कुँआ।


मानो या न मानो

कारण केवल एक,

अतीत की देवी हुई

बंटाढार की चुड़ैल।


अब नहीं रहा 

भाई भाई में प्रेम,

बो रहीं पत्नियाँ

कानों में वहम,

भाड़ में जाएँ 

सास-ससुर

देवर ननद जेठ,

वैमनस्य का बीज-वपन

नारी कर्म श्रेष्ठ।


गार्हस्थ के महाभारत का

मूल विवाहिता नारी,

प्रेम की दुश्मन 

पैनी छुरी आरी,

न मानो तो

घर-घर में देख लो,

सभी चूल्हे 

द्रव पेट्रोलियम गैस पर

दिखते हैं स्टील के,

पर कच्ची माटी के 

बने हैं।


शुभमस्तु,


20.08.2026◆6.15 प०मा०

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