सोमवार, 24 अगस्त 2026

कीचड़ में सनते युगल पाँव [ गीत ]

 265/2026


 


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


पढ़ने जातीं

गणवेश पहन

कीचड़ में सनते युगल पाँव।


भारत का 

देखो नव विकास

सड़कें टूटी

झेलते नित्य

जो सर्वनाश

किस्मत फूटी

जा रहे समेटे विद्यालय

निज वस्त्र

लगाए भाग्य दाँव।


भारी भरकम

लादे बस्ते

है नील वेश

स्कर्ट बचाएँ

वे कैसे

है यही देश

नेता कहते

विकसित

भारत के सभी गाँव।


चलने भर को भी

नहीं गैल

जिनको  कोई

पग-पग पर

पिछड़ी मानवता

हर क्षण रोई

झूठे वादों की

लगी 

वोट की काँव-काँव।


शुभमस्तु,


18.08.2026 ◆6.00आ०मा०

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