सोमवार, 24 अगस्त 2026

जाति-भेद अलगाव से [ दोहा गीतिका ]

 272/2026


          



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जाति-भेद   अलगाव   से,खंडित देश महान।

एक राष्ट्र ध्वज  एक  ही,नीला गगन वितान।।


गंगा यमुना  सरस्वती,  कृष्णा    सिंधु अनेक,

सरिताएँ  बहतीं  यहाँ,करें अमिय जल पान।


हिंदी   कन्नड़   तमिल  हैं,इंद्रधनुष   के रंग,

भाषाओं   के  रंग  हैं,  भारत   की पहचान।


साड़ी   या   सलवार   में,कोई   नहीं विभेद,

पेंट  शर्ट   जन   धारते,   धोती   वेश पुरान।


चावल रोटी   दाल   सब, खाते विविधाहार,

हरे शाक रुचि से कहें,दिखलाते निज शान।


सीखें  हम  इतिहास   से,रहे  न जन में फूट,

राष्ट्र एकता   के  लिए,   रहें   संगठित प्रान।


'शुभम्' शत्रु की चाल को,हम तोड़ें   हर हाल,

आँखें खुलें दिमाग की,खुले रखें निज कान।


शुभमस्तु,


24.08.2026 ◆ 6.15आ०मा०

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