गुरुवार, 23 जुलाई 2026

छरर -छरर छर बरसें [ गीत ]

 240/2026


           


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


छरर-छरर छर

छर-छर बरसें

आसमान से बूँदें।


फैला अपने

हाथ हथेली

भर-भर अँजुरी पीते

जेठ मास के

प्यासे मानव 

थे मुरझाए जीते

गिरतीं बूँदें

जब पलकों पर

नयन सभी हम मूँदें।


आँगन

गली- गली में बालक

क्रीड़ा में हैं लीन

छपर-छपर छप

छप -छप जल की

तैर रहीं  ज्यों मीन

नव किशोर

बालाएँ जल में

नाच-नाच कर कूदें।


तरु पल्लव

हरियाये कोमल

टपर-टपर टप होती

गिरें धरा पर

हरी घास पर

बिखर रहे ज्यों मोती

बिजली- सी

दौड़ती देह में

बूँद मेह की छू दें।


शुभमस्तु,


21.07.2026◆10.30 आ०मा०

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