246/2026
समांत : अट
पदांत :अपदांत
मात्रा भार :16.
मात्रा पतन :शून्य
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जंतर मंतर पर है खटपट।
तिलचट्टों की भारी खटखट।।
कहते तुम्हें न आता शासन।
दौड़ रहे सड़कों पर छट-छट।।
लक्ष्य भूल बैठे वे सारा।
नर्तित मद में फैलाए लट।।
अभिनय मजा मौज मस्ती का।
भरे जा रहे पापों का घट।।
छात्र न्यून बहुतेरे गुंडे।
बस हल्ले की लगी हुई रट।।
संसद रोड हो गया दूषित।
बने हुए कोरे अभिनय-नट।।
बढ़ता है जब दूषण घर में।
कॉकरोच तब जाते हैं डट।।
बिना बहाए स्वेद देह का।
जाते हैं तब मुफ्तखोर अट।।
'शुभम्' कहे क्या हाल देश का।
खटमल मसक फिरें यमुना तट।।
शुभमस्तु,
27.07.2026◆6.45 आ०मा०
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