बुधवार, 18 सितंबर 2024

गणपति बप्पा गेह पधारें [बालगीत]

 405/2024

    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


गणपति      बप्पा     गेह   पधारें।

विघ्न    हमारे    पल    में     टारें।।


विद्या   -   ज्ञान    हमें    करवाएँ।

हिंदी  भाषा    हमें      सिखाएँ।।

स्वर  व्यंजन  का   ज्ञान   विचारें।

गणपति    बप्पा     गेह    पधारें।।


मोदक   प्रिय हे    मोद   प्रदाता।।

गीत  तुम्हारे     प्रभु    मैं   गाता।।

जय  गौरी शिव    सुत    उच्चारें।

गणपति     बप्पा   गेह    पधारें।।


'शुभम्' आप आएँ   दुख हर लें।

ज्ञान प्राप्त कर  झोली भर लें।।

हम  आपकी   आरती    उतारें।

गणपति बप्पा    गेह    पधारें।।


शुभमस्तु !


15.09.2024◆12.15प०मा०

                    ★★★

जननी धरती गगन पिता [बालगीत ]

 404/2024

       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जननी  धरती    गगन   पिता जी।

युगल  मूर्ति  जीवित   ममता की।।


मात -पिता  के   बिना   न  हम हैं।

कोई  नहीं  किसी  से    कम   हैं।।

जग  में   कहीं   नहीं   समता  भी।

युगल  मूर्ति  जीवित    ममता की।।


मात - पिता    के    अहसानों  का।

स्वार्थ   बिना    उनके    दानों का।।

बदला   संतति    नहीं      चुकाती।

युगल  मूर्ति जीवित    ममता की।।


'शुभम्'  नित्य वह  पद - रज पाएँ।

नत ललाट  कर    शीश   झुकाएँ।।

कभी  न संतति    उनसे    छाकी।

युगल  मूर्ति  जीवित  ममता की।।


शुभमस्तु !


15.09.2024●10.45आ०मा०

                    ★★★

जननी-पद शीश नवाएँ [बालगीत]

 403/2024

     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


गुरुवर  प्रथम नित्य  हम ध्याएँ।

निज  जननी- पद शीश  नवाएँ।।


जन्म दिया निज गोद  खिलाया।

आँचल से ढँक  दूध   पिलाया।।

उस माता को बलि -बलि जाएँ ।

गुरुवर  प्रथम नित्य हम ध्याएँ।।


नौ - नौ मास   कोख    में  ढोया।

कष्ट  झेलती   मैं    सुख   सोया।।

कैसे  उसे    भूल     हम  पाएँ।।

गुरुवर  प्रथम नित्य हम  ध्याएँ।।


 गीली   कथरी  में   माँ    सोती।

 मुझे   सहेजा     जैसे     मोती।।

'शुभम्'  भूल  माँ को क्यों  जाएँ।

गुरुवर  प्रथम नित्य   हम ध्याएँ।।


शुभमस्तु !


15.09.2024◆10.30आ०मा०

                    ★★★

कोयल बोले [बालगीत]

 402/2024

             

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अमराई       में     कोयल     बोले।

कान - कान में    मधुरस    घोले।।


आता  जब   ऋतुओं   का  राजा।

महकें  बौर  आम    पर   ताजा।।

सघन  पल्लवों  में    पिक  डोले।

अमराई  में       कोयल    बोले।।


कुहू -  कुहू   की  बोली    प्यारी।

वेला  ब्रह्म     लगे      मन हारी।।

बंद कान    के    परदे     खोले।।

अमराई    में     कोयल    बोले।।


'शुभम्'   सँदेशा    हमको   देती।

मधु    भाषा    है     नेती - नेती।।

बोलो हर - हर बम - बम   भोले।

अमराई  में      कोयल     बोले।।


शुभमस्तु !

15.09.2024◆9.30आ०मा०

                ★★★

तितली रानी [बालगीत]

 

 401/2024

              


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


तितली रानी !     तितली   रानी!!

तेरा   और    न     कोई    सानी।।


रंग  -बिरंगी     उड़ती -   फिरती।

फूल  -  फूल पर मानो   तिरती।।

पंख  लाल   पीले  सित    धानी।

तितली  रानी !     तितली रानी!!


रस  लेती      सुगन्ध    फैलाती।

पीत   पराग   खूब    बरसाती।।

कभी  न  तू   डरती   अकुलानी।

तितली रानी !    तितली   रानी।।


'शुभम्'   मनोरम   जीवन   तेरा।

सुख  बरसाती    सदा    घनेरा।।

तेरी  सीख  सदा     हम   मानी।

तितली रानी !     तितली रानी!!


शुभमस्तु!


15.09.2024◆9.00आ०मा०

                  ★★★


आओ फूलों -से मुस्काएँ [बालगीत ]

 

    400/2024


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


आओ       फूलों -  से    मुस्काएँ।

नव  सुगंध   से   जग    महकाएँ।।


फूलों   जैसा    अपना     जीवन।

महकाता   है   सबको   बचपन।।

मात -  पिता  को  शीश  झुकाएँ।

आओ    फूलों -  से     मुस्काएँ।।


पेड़ों  की  ज्यों   कोमल    डाली।

जैसे  चाहा   वहीं     झुका   ली।।

विनत  भाव  जीवन    में    लाएँ।

आओ   फूलों - से        मुस्काएँ।।


'शुभम्'  फूल  ही   फल  भी देते।

नहीं  किसी  से कुछ    भी  लेते।।

ऐसे   हम      दानी     बन    जाएँ।

आओ     फूलों  - से      मुस्काएँ।।


शुभमस्तु!


15.09.2024◆8.30आ०मा०


                   ★★★

[9:28 am, 15/9/2024] DR  BHAGWAT SWAROOP: 

आओ मित्रो पेड़ लगाएँ [ बालगीत ]

 399/2024

     


©शब्दकार

©डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


आओ    मित्रो    पेड़    लगाएँ।

धरती  माँ    के   प्राण  बचाएँ।।


पेड़ों    से    ही   मानव    जीते।

प्राणवायु   साँसों     में    पीते।।

शुद्ध  वायु  से   जग   सरसाएँ।

आओ  मित्रो     पेड़    लगाएँ।।


पेड़ों  से     ही    बादल   छाते।

उमड़ -घुमड़  पानी    बरसाते।।

आम नीम    शीशम   उपजाएँ।

आओ  मित्रो   पेड़      लगाएँ।।


'शुभम्'   पेड़  हैं   पूज्य   हमारे।

जन जीवन  के   सदा    सहारे।।

जीवन  की  बगिया    महकाएँ।

आओ   मित्रो     पेड़    लगाएँ।।


शुभमस्तु !

15.09.2024◆8.00आ०मा

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...